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अंधकार

गुरुदत्त

प्रकाशक : हिन्दी साहित्य सदन प्रकाशित वर्ष : 2020
पृष्ठ :192
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 16148
आईएसबीएन :000000000

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गुरुदत्त का सामाजिक उपन्यास

बन्दौं चरण सरोज तिहारे

अभी यह पद गाया ही जा रहा था कि कमला कमरे में आयो और संगीताचार्य के पीछे कुछ अन्तर पर बैठ गयी। ऐसा पहले भी कभोकमी हुआ करता था। संगीताचार्य मधुकर ने उसकी ओर देखा तो कमला ने होठों पर अंगुली रखकर चुप रहने का संकेत कर दिया।

सूरदास अगला पद गाने लगा था...

सुन्दर स्याम कमल दल लोचन, ललित त्रिभंगी प्राण पियारे।।
बन्दौ चरण सरोज तिहारे।

इस पद पर पुन: आलाप होने लगा। पहले आलाप शिक्षक करता था, तदनन्तर सूरदास करता था। इस समय शीलवती और उसके पीछे चन्द्रावती भी आ गयीं। जब वे आयीं तो कमला ने उनको भी होठों पर अंगुली रखकर चुप रहने का और उनको बैठने का संकेत कर दिया।

दोनों स्त्रियां भी बैठ गयीं। संगति चलती गयी। सूरदास पद के उपरान्त पद गा रहा था और तानालाप चल रहे थे। कमला और शील तो संगीत के प्रवाह में झूम रही प्रतीत होने लगी थीं। चन्द्रावती भी, जो क्रोध से भरी हुई आयी थी, सगीत तथा भजन के शान्तिप्रद प्रभाव से मौन हो बैठगयी थी।

सूरदास ने गाया..

जे पद पदुम सदा लिव के धन, सिंधु सुता तैं उर नहिं टारे।
जे पद पदुम तात रिस त्रासत, मन बच क्रम प्रह्लाद संभारे।।

आधा घण्टा तक संगीत चलता रहा। जब सूरदास गा रहा था तब मधुकर हाथ से ताल दे रहा था। अब सूरदास खड़तालों से ताल देने लगा। एक घण्टा भर संगीत हो चुका तो प्रकाशचन्द्र आ गया। वह मां, बहन और उसकी अध्यापिका को वहां बैठे देख चकित रह गया।

वैसे तो कमला पहले भी कभी-कभी संगीत सुनने आया करती थी। उसकी अध्यापिका भी कभी आ जाया करती थी, परन्तु प्रकाश की

माता को वहाँ बैठ सुनते मधुकर ने पहली बार ही देखा था।

संगीत का अभ्यास समाप्त होने वाला था। सुन्दरदास 'टेर' वर सूरदास और उसके शिक्षक के लिये तश्तरियों में मिठाई तथा गिलासों में दूध लिये खड़ा था।

गाना समाप्त हुआ। सुन्दरदास आगे बढ़ आया। उसने ट्रे सूरदास के सामने रख दी। तत्पश्चात् उसने कमरे में लदी अलमारी में से चन्दन की कटोरी निकाली और गुसलखाने से उसमें दो बूंद जल डालकर ले आया। चन्दन घोलकर उसने सूरदास के माथे पर तिलक लगा दिया। सूरदास ने विस्मय में तिलक लगाने वाले की ओर देखा; तदनन्तर बोला, "सुन्दर। बहुत देर कर आते हो।"

''भैया! आधे घण्टे से आया खडा था, परन्तु भजन के बीच में रोकना ठीक नहीं लगा।"

''उससे पहले आना था।''

सुन्दरदास ने प्रश्न भरी दृष्टि में कमला की ओर देखा। वह दूसरी ओर देख रही थी। इस पर सुन्दरदास ने कहा, "भैया। कल से जल्दी आया करूंगा।

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    अनुक्रम

  1. प्रथम परिच्छेद
  2. : 2 :
  3. : 3 :
  4. : 4 :
  5. : 5 :
  6. : 6 :
  7. : 7 :
  8. : 8 :
  9. : 9 :
  10. : 10 :
  11. : 11 :
  12. द्वितीय परिच्छेद
  13. : 2 :
  14. : 3 :
  15. : 4 :
  16. : 5 :
  17. : 6 :
  18. : 7 :
  19. : 8 :
  20. : 9 :
  21. : 10 :
  22. तृतीय परिच्छेद
  23. : 2 :
  24. : 3 :
  25. : 4 :
  26. : 5 :
  27. : 6 :
  28. : 7 :
  29. : 8 :
  30. : 9 :
  31. : 10 :
  32. चतुर्थ परिच्छेद
  33. : 2 :
  34. : 3 :
  35. : 4 :
  36. : 5 :
  37. : 6 :
  38. : 7 :
  39. : 8 :
  40. : 9 :
  41. : 10 :

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