लोगों की राय

आचार्य श्रीराम शर्मा >> महाकाल का सन्देश

महाकाल का सन्देश

श्रीराम शर्मा आचार्य

प्रकाशक : युग निर्माण योजना गायत्री तपोभूमि प्रकाशित वर्ष : 2000
पृष्ठ :60
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 16271
आईएसबीएन :000000000

Like this Hindi book 0

Mahakal Ka Sandesh - Jagrut Atmaon Ke Naam - a Hindi Book by Sriram Sharma Acharya

¤ ¤ ¤


हमारी कड़ी हिदायत यह है कि आर्थिक या नैतिक छिद्र अपनी (युग निर्माण मिशनगायत्री परिवार) प्रक्रिया में कहीं न बनने पाये, अन्यथा प्रामाणिकता पर ऊँगली उठने लगने पर वह तेजस्विता समाप्त हो जाएगी, जिसके आधार पर असंभवसमझे जाने वाले कार्य संपन्न होने जा रहे हैं। हमारे आंदोलन की सफलता और मिशन की प्रगति का क्रम तभी तक तूफानी गति से चल सकेगा, जब तक उसकीपवित्रता और प्रामाणिकता हर कसौटी पर खरी सिद्ध होती रहेगी। संगठन की मूलभूत शक्ति-सामर्थ्य में कहीं कोई छिद्र बन सके, ऐसा नहीं होने दिया जाए।

(अखण्ड ज्योति-१९८८, दिसम्बर)

 

¤ ¤ ¤


जिनका विवेक जग सके, वे समय को पहचाने, अपनी गरिमा और भूमिका समझें और बालक्रीड़ाओं में ही उलझे न रहें। वरिष्ठों और विशिष्टों की कोई महत्त्वपूर्ण भूमिका इस आपत्तिकाल में भी न बन सकी, तो इतना ही कहा जाएगा कि भावनाओं केपंख कट गये और वह मात्र कल्पना के पिंजड़े में तड़फड़ाती हुई दम तोड़ गईं। नफे-नुकसान का बहीखाता फैलाने का यह समय नहीं है। इन दिनों तो शूरवीरों कीतरह सिर हथेली पर रखकर धर्मयुद्ध में कूद पड़ने में ही हमारे वर्चस्व की सार्थकता है। समय बिना किसी की प्रतीक्षा किये चला जाएगा। उसे इस बात कीपरवाह नहीं कि कौन दूरदर्शिता का परिचय देता है, कौन व्यामोह के चक्रव्यूह में फँसा रहता है?

(महाकाल की आकांक्षा-३१)

 

¤ ¤ ¤


जीवन का हर क्षण एक उज्ज्वल भविष्य की संभावना लेकर आता है। हर घड़ी एक महान्मोड़ का समय हो सकती है। मनुष्य यह निश्चयपूर्वक नहीं कह सकता है कि जिस समय, जस क्षण और जिस पल को वह यों ही व्यर्थ में खो रहा है, वह ही क्षणवहही समय उसके भाग्योदय का समय नहीं है? क्या पता जिस क्षण को हम व्यर्थ समझकर बरबाद कर रहे हैं, वह ही हमारे लिए अपनी झोली मं  सुन्दरसौभाग्य की सफलता लाया हो।

(अखण्ड ज्योति-१९६६, अगस्त-१९)

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book