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इतिहास और राजनीति >> भारत की एकता का निर्माण

भारत की एकता का निर्माण

सरदार पटेल

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :350
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 62
आईएसबीएन :

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स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत की एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा देश की जनता को एकता के पक्ष में दिये गये भाषण


मैंने जब राजाओं का काम किया था, तो रियासतों में कई लोग कहते थे कि भई, यह राजाओं को हिन्दुस्तान में ले तो आया, लेकिन तब से रियासतों के लोगों को दुख है।(किन लोगों को दुःख हुआ, शायद उनको जो राजा के राज में  अपनी मनमानी कर लेते थे, अब उसमें विघ्न पड़ गया था। अथवा संशय और परिवर्तन की परिस्थितियों जिनका काम बिगड़ने लगा था, इस प्रकार की समस्यायें परिवर्तन के समय में आती हैं, जैसे किसी बड़े जन आन्दोलन के समय भारत बंद का आह्वान हो और उसी समय आपको आकस्मिक चिकित्सा के लिए चिकित्सालय जाना पड़े।)  हिन्दोस्तान के आजाद होने पर कुछ राजा तो यह समझे थे कि अब वे जो चाहें सो कर सकते हैं। मैंने चालीस रियासतों को तो बिल्कुल एक दो रोज़ में साफ कर दिया। तब सब लोग समझ गए कि कोई नई बात हुई है। मैने राजाओं को भी समझाया और रियासतों के लोगों को भी समझाया। दोनों को एक दूसरे का साथ देने को कहा। मैं राजाओं से कहता हूँ कि जो रैयत की नहीं मानेगा, उस राजा को अगर मैं रखना चाहूं, तो भी वह नहीं रह सकता। वह जरूर चला जाएगा। वह रह ही नहीं सकता। इसी प्रकार जो धनिक लोग हैं, उनको भी मैं समझा देना चाहता हूँ कि धन तो आपके पास तभी रह सकता है जब कि आप उन लोगों को भी खुश रक्खें, जिन लोगों के पास से आप धन पैदा करते हैं। लेकिन हम अगर लेबर को कोई तालीम न दें, तो हमारी आधुनिक लेबर बहक जाएगी।

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