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इतिहास और राजनीति >> भारत की एकता का निर्माण

भारत की एकता का निर्माण

सरदार पटेल

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :350
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 62
आईएसबीएन :

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स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत की एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा देश की जनता को एकता के पक्ष में दिये गये भाषण


पन्द्रह अगस्त के बाद दोनों देशों में जो काम हुआ है, वह इस प्रकार का काम हुआ है कि, उससे दुनिया के सामने हमें सिर झुकाना पड़ा, हमको शर्मिन्दा होना पड़ा। लेकिन उसके बावजूद भी पिछले पाँच-छः महीनों में हमने काफी काम किया है। चन्द महीनों में सारे मुल्क के दो हिस्से करना, दो बड़े-बड़े प्रान्तों के दो हिस्से करना और इस प्रक्रिया में सारी हुकूमत के और सारी सामग्री के दो टुकड़े करना, देश के सम्पूर्ण कर्ज, लेन-देन और जायदाद के दो हिस्से करना, यह कोई आसान काम नहीं था। हमने थोड़े दिनों में यह काम पूरा किया और इसके लिए हम किसी अदालत में नहीं गए। हमने आपस में बैठ कर तै कर लिया। इतनी लड़ाई होते हुए भी हमने यह काम किया। साथ ही साथ कोई साठ-सत्तर लाख आदमी इस तरफ से उस तरफ को चले गए, और लगभग उतने ही आदमी उस तरफ से इस तरफ को चले आए। तो यह बहुत बड़ा काम था। दुनिया में कोई भी हुकूमत अगर उस काम के बोझ से दब जाती, तो उसमें कोई ताज्जुब की बात नहीं थी।

यह काम तो हमने किया, मगर अभी जो बहुत जरूरी काम करना बाकी है, वह है हिन्दुस्तान की हवा साफ करना। क्योंकि अब आजाद हो जाने के बाद भी हम अगर इसी काम में फँसे रहे, इसी तरह आपस में झगडा करते रहे, तो कोई काम नहीं होगा। आप यह जानते हैं कि हिन्दुस्तान में आज क्या हालत है। देश को अगर आप देख लें, तब आपको मालूम पड़ेगा कि हमें जो काम करना चाहिये, वह हम नहीं करते और उससे हमें नुकसान होता है। उस नुकसान को हमें रोकना है।

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