Viveki Rai/विवेकी राय
लोगों की राय

लेखक:

विवेकी राय
जन्म :- 19 नवम्बर, 1924।

जन्म-स्थान :- ग्राम भरौली, ज़िली बलिया (उ.प्र.)।

शिक्षा :- प्रारम्भिक शिक्षा पैतृक गाँव सोनयानी, गाज़ीपुर में। महात्मा गाँधी, काशी विद्यापीठ से पी-एच.डी.। शुरू में कुछ समय खेती-बाड़ी में जुटने के बाद अध्यापन कार्य में संलग्न। सम्प्रति स्वतन्त्र लेखन।

पुरस्कार/सम्मान :- उ.प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा ‘प्रेमचन्द पुरस्कार’ साहित्य भूषण सम्मान, म.प्र. शासन द्वारा ‘राष्ट्रीय शरद जोशी सम्मान’, बिहार राजभाषा विभाग द्वारा ‘आचार्य शिवपूजन सहाय पुरस्कार’ तथा हिन्दी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा विद्यावाचस्पति’ और ‘साहित्य महोपाध्याय’ सम्मान।

कृतियाँ :-

उपन्यास :- बबूल, पुरुष पुराण, लोकऋण, श्वेतपत्र, सोनामाटी, समर शेष है, मंगल भवन, नमामि ग्रामम्, अमंगलहारी, देहरी के पार।

कहानी-संग्रह :- जीवन परिधि, गूँगा जहाज :- (रामलीला, चुनाव-चक्र, बाढ़ की यमदाढ़ में, टुकरा मिले बहुरिया, आकाश वृत्ति, हाय रे परान, आदमी का पइया, गोरी का गाँव, घण्टा, दीप तले अँधेरा, गूँगा जहाज, तिला-मूँगा, झगड़ा, राक्षस, घाट-घाट का पानी, पदयात्रा, लोगों को नेता चाहिए, भदेस, दंतरवा मदारी, समझ का प्रयोग।), नई कोयल, कालातीत :- (वही इन्द्रधनुष, परन्तु, कालातीत, तारीखें, बाप मोरे भइले कठबपवा, अतिथि, आप लोग कौन हैं, खेल, स्वयं मेले, नयी नाव, समाजवादी सुबह में एक दिन, गोता, मकड़जाल, हमारे गाँव कहाँ हैं?, विलायती डिजाइन का अफसर, यह जमाना..., सीवान का कोल्हू।), बेटे की बिक्री, चित्रकूट के घाट पर, विवेकी राय की श्रेष्ठ कहानियाँ, सर्कस :- (तू क्यों सोया?, सर्कस, कहाँ बचकर जाओगी?, चौथा पाया, अपना हाथ जगन्नाथ, शोभा यात्रा, तमाशा, ‘तिरसठ, तिरासी और तिरानबे’, महाकवि, रोग-मुक्ति की कहानी।)।

काव्य :- अर्गला, रजनी गंधा, यह जो है गायत्री।

ललित निबंध :- फिर बैतलवा डाल पर, जलूस रुका है, गँवई गंध गुलाब, मनबोध मास्टर की डायरी, नया गाँवनामा, मेरी श्रेष्ठ व्यंग्य रचनाएँ, आम रास्ता नहीं है, जगत् तपोवन सो कियो।

निबंध और शोध समीक्षा :- त्रिधारा, गाँवों की दुनिया, किसानों का देश, अध्ययन आलोक, स्वातंत्र्योत्तर कथा-साहित्य और ग्राम-जीवन, हिंदी-उपन्यास : उत्तरशती की उपलब्धियाँ, हिंदी कहानी : समीक्षा और संदर्भ, समकालीन हिंदी उपन्यास, हिंदी उपन्यास : विविध आयाम, आस्था और चिंतन।

भोजपुरी साहित्य :- के कहल चुनरी रँगा ल (ललित निबंध), जनता के पोखरा (काव्य), भोजपुरी कथा-साहित्य के विकास (समीक्षा), ओझइती (कहानी संग्रह), गंगा-जमुना-सरस्वती (विविध विधा), अड़बड़ भइया की भोजपुरी चिट्ठी (फीचर)।

अमंगलहारी

विवेकी राय

मूल्य: $ 9.95

‘अमंगलहारी’ को पढ़कर पाठकों को सहज ही लग सकता है कि यह लघु उपन्यास लेखक के पूर्व प्रकाशित विशाल उपन्यास ‘मंगल भवन’ का दूसरा भाग अथवा उससे जुड़ा उपसंहार अंश है। ‘मंगल भवन अमंगलहारी’ वाली चौपाई की अर्द्धाली पूर्ण हो जाती है।   आगे...

कालातीत

विवेकी राय

मूल्य: $ 7.95

भारतीय गाँवों की दुर्दशा को सम्मुख करते हुए व्यवस्था को खोखलेपन को उजागर करती कहानियाँ...   आगे...

गूँगा जहाज

विवेकी राय

मूल्य: $ 8.95

स्वातंत्र्योत्तर गाँवों व ग्रामीण समाज के बदलते रूप का वर्णन   आगे...

देहरी के पार

विवेकी राय

मूल्य: $ 16.95

प्रस्तुत है श्रेष्ठ उपन्यास...   आगे...

पुरुष पुराण

विवेकी राय

मूल्य: $ 6.95

लघु उपन्यास   आगे...

फिर बैतलवा डाल पर

विवेकी राय

मूल्य: $ 8.95

फिर बैतलवा डाल पर की रचनाएँ ग्रामीण जीवन की हैं...   आगे...

मंगल भवन

विवेकी राय

मूल्य: $ 29.95

गाँव मेरा आराध्य देव है उसी के सूत्र से ‘मंगल भवन’ में मैंने राष्ट्र-देवता को पकड़ने का प्रयास किया है।   आगे...

समर शेष है

विवेकी राय

मूल्य: $ 31.95

प्रस्तुत है समर शेष है...   आगे...

सर्कस

विवेकी राय

मूल्य: $ 8.95

प्रस्तुत है सर्कस.....   आगे...

 

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