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टालना  : स० [हिं० टलना०] १. किसी को उसके स्थान से खिसकाना या हटाना। २. अपना कोई उद्देश्य सिद्ध करने के लिए किसी को किसी बहाने से अपने सामने से दूर करना या हटाना। जैसे–जब वह शराब पीने बैठता था, तब लड़कों को अपने कमरे से टाल देता था। ३. किसी उद्देश्य से आये हुए व्यक्ति का उद्देश्य पूरा न करके किसी बहाने से उसे कुछ समय के लिए दूर कर देना या हटा देना। टरकाना। जैसे–जब उससे रुपए माँगने जाओ, तब किसी न किसी बहाने से हमें वह टाल देता है। ४. अनिष्ट घटना या स्थिति से किसी को रक्षित रखने अथवा स्वंय रक्षित रहने के लिए किसी युक्ति से उसे घटित न होने देना या दूर करना। जैसे–(क) किसी की विपत्ति या संकट टालना। (ख) अपने मन में आया बुरा विचार टालना। ५. कोई काम अपने पूर्व-निश्चित समय पर न करके उसे किसी और समय के लिए छोड़ रखना। जैसे–परीक्षा या विवाह की तिथि टालना। ६. जो काम अभी किया जाने को हो, उसे किसी और समय के लिए छोड़ रखना। जैसे–इस तरह हर काम टालने की आदत छोड़ दो। मुहावरा–(कोई काम या बात) किसी पर टालना=स्वंय कोई काम या बात करके यह कह देना कि इसे अमुक व्यक्ति कर सकता है या करेगा। जैसे–तुम तो अपना सारा काम मुझ पर टाल दिया करते हो। ७. किसी के अनुरोध, आज्ञा, परामर्श आदि की उपेक्षा करना या उस पर उचित ध्यान न देना। जैसे–आप की बात मैं किसी तरह टाल नहीं सकता। ८. कोई अनुचित काम या बात होती हुई देखकर भी उसकी उपेक्षा करना या उस पर ध्यान न देना। तरह दे जाना। बचा जाना। जैसे–अब तक तुम्हारे सब दुर्व्यवहार हम टालते आये हैं, पर आगे के लिए तुम्हें सावधान करना चाहिए। ९. बहुत कठिनता से समय व्यतीत करना। ज्यों-त्यों करके वक्त बिताना। उदाहरण–राम बियोग असोक बिटप तर सीय निमेष कलप सम टारति।–तुलसी।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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