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झोल  : पुं० [हिं० झूलना या झूला] १. ताने जानेवाले कपड़ों का वह अंश या भाग जो उचित कसाव या तनाव के अभाव में किसी ओर कुछ झुका, दबा या फूला रहता है। जैसे–छत में टँगी हुई चादर या शामियाने में का झोल। २. पहनने के कपड़ों में उक्त प्रकार का ढीला ढाला अंश जो प्रायः कटाई-सिलाई आदि के दोषों के कारण होता है। जैसे–कमीज, कुरते या कोट का झोल। ३. ओढ़े या बाँधे जानेवाले कपड़ों का आंचल, पल्ला या सिरा जो किसी ओर झूलता या लटकता रहता है। जैसे–पगड़ी या साड़ी का झोल। ४. झिल्ली की वह थैली जिसमें गर्भ से निकलने के समय अंडे या बच्चे बंद या लिपटे रहते हैं। मुहावरा–झोल बैठाना=सेने के लिए मुरगी के नीचे अंडे रखना। ५. खिड़कियों, दरवाजों आदि में टाँगने का परदा। ६. किसी प्रकार की खड़ी की हुई आड़ या ओट। ७. तरकारियों आदि में का रसा या शोरबा जिसमें उनके टुकड़े झूलते या इधर-उधर हिलते हुए दिखाई देते हैं। ८. उक्त प्रकार की अथवा कढ़ी की तरह की खाने या पीने की कोई चीज। जैसे–आम या इमली का झोल। ९. भारत में से निकाली हुई पीच। माँड़। १॰. धातु की चीजों पर किया जानेवाला गिलट या मुलम्मा। क्रि० प्र०–चढ़ाना–फेरना। ११. हाथी की वह दोषपूर्ण चाल जिसमें वह कुछ इधर-उधर झूलता हुआ सा चलता है। १२. किसी प्रकार की कमी, त्रुटि या दोष। उदाहरण–कैधों तुम पावन प्रभु नाहीं, कै कछु मो मैं झोलो।–सूर। १३. झंझट, धोखे या बखेड़े की बात। जैसे–यब सब झोल है, पहले हमारा रुपया चुकाकर तब और कोई बात करो। १४. चूक। भूल। पद–झोल-झाल (देखें)। वि० १. जिसमें उचित कसाव या तनाव हो। २. निकम्मा और व्यर्थ का अथवा निस्सार। ३. दूषित। बुरा। पुं० [हिं० झाल] १. जलन। दाह। २. भस्म। राख। उदाहरण–तेहि पर बिरह जराइ कै चहै उड़ावा झोल।–जायसी।
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झोल-झाल  : पुं० [हिं० झोंल+अनु० झाल] १. कपड़ों में का झोल। २. निकम्मी या व्यर्थ की चीज या बात। वि० १. ढीला-ढाला। २. निकम्मा या व्यर्थ। ३. दूषित। बुरा।
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झोलदार  : वि० [हिं० झोंल+फा० दार] १. (तरकारी) जिसमें झोल अर्थात् रसा हो। रसेदार। २. (धातु) जिस पर मुलम्मा हुआ हो। ३. (वस्त्र) जिसमें झोल पड़ता हो।
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झोलना  : स० [सं० ज्वलन] १. तपाना या जलाना। २. संतप्त या दुःखी करना। स० १. दे० ‘झुलाना’। २. दे० ‘झकझोरना’। अ० दे० ‘झूलना’।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है)
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झोला  : पुं० [हिं० झूलना या झोली] [स्त्री० अल्पा० झोली] १. कपड़े आदि की सिली हुई एक प्रकार की प्रसिद्ध लंबोत्तरी थैली जिसके मुँह पर डोरी या तनी उसे पकड़ने या लटकाने के लिए लगी रहती है थैला। २. कपड़े का सिला हुआ आवरण। खोली। जैसे–बंदूक का झोला। ३. साधुओं के पहनने का ढीला-ढाला कुरता। ४. वात रोग के कारण होनेवाला एक प्रकार पक्षाघात जिसमें हाथ या पैर निष्प्राण होकर झूलने लगते हैं। क्रि० प्र०–मारना। ५. पाले, लू आदि के कारण पेड़ों के कुम्हला या सूख जाने का एक रोग। ६. आघात। धक्का। ७. झोंका। झकोरा। उदाहरण–कोई खाहिं पवन कर झोला।–जायसी। ८. पाल की रस्सी को ढीला करने की क्रिया ९. इशारा। संकेत।
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झोलिहारा  : पुं० [हिं० झोली+हारा (प्रत्यय)] १. वह जो गले या हाथ में अथवा कंधे पर झोली लटकाकर चलता हो। २. कहार।
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झोली  : स्त्री० [प्रा० झोल्लिअ] १. छोटा झोला। थैली। २. ओढ़े या पहने हुए कपड़े का पेट पर पड़नेवाला वह अंश जिसे दोनों हाथों से फैलाकर उसमें कोई चीज ग्रहण की जाती है। जैसे–फकीर अपनी झोली में रोटियाँ रखता जाता था। क्रि० प्र०–फैलाना। मुहावरा–झोली डालना=भिक्षा ग्रहण करने के लिए झोली फैलाना। (किसी की) झोली भरना-देवी, देवता आदि का प्रसाद किसी की झोली में डालना। (मंगल सूचक) ३. वह कपड़ा जिसकी सहायता से अनाज ओसाया या बरसाया जाता है। ४. घास-फूस आदि बाँधने का बड़ा जाल। ५. चीजें फँसाने के लिए बनाया जानेवाला रस्सियों का एक प्रकार का फंदा। ६. चरसा। मोट। ७. एक प्रकार का सफरी बिस्तर। विशेष दे० ‘झूला’ के अन्तर्गत। स्त्री० [सं० ज्वाला या झाला] राख। भस्म। मुहावरा–झोली बुझाना=(क) कार्य का संपादन या बात की सिद्धि हो जाने के उपरांत किसी का उसे करने का ढोंग रचना। (ख) निराश होकर या व्यर्थ बैठना।
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