शब्द का अर्थ
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बत :
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स्त्री० [हिं० बात का संक्षिप्त रूप] हिंदी ‘बात’ का संक्षिप्त रूप जो उसे समस्त पदों के आरम्भ में लगने से प्राप्त होता है। जैसे—बत-कही, बत-रस। स्त्री० [अ०] १. बतख की जाति की एक मौसमी चिड़िया जो मटमैले रंग की होती है। १. बत्तख। |
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बतक :
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स्त्री० [हिं० बत्तख] १. बत्तख की गरदन के आकार की एक प्रकार की सुराही जिसमें शराब रखी जाती थी। (राज० ) २. बत्तख नाम की चिड़िया। |
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बत-कट :
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वि० [हिं० बात+काटना] १. बाट काटने अर्थात् उसकी यथार्थता को चुनौती देनेवाला। २. किसी के बोलने के समय बीच में उसे बार-बार टोकनेवाला। उदाहरण—नस-कट खटिया बत-कट जोय।—घाघ। |
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बत-कहाव :
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पुं०=बत-कही। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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बत-कही :
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स्त्री० [हिं० बात+कहना] १. साधारणतः केवल मन वहलाने या सम बिताने के लिए की जानेवाली इधर-उधर की बात-चीत। उदाहरण—करत बत-कही अनुज सम मन सिय-रूप लुभान।—तुलसी। २. बात-चीत की तरह का बहुत ही तुच्छ या साधारण काम। उदाहरण—दसकंधर मारीच बत-कही।—तुलसी। ३. बाद-विवाद। कहा-सुनी। तकरार। ४. झूठ-मूठ या मन से गढ़कर कही जानेवाली बात। |
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बतख :
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स्त्री० [अ० बत] हंस की जाति की पानी की एक चिड़िया जिसका रंग सफेद पंजे झिल्लीदार और चोंच का अग्र भाग चिपटा होता है। और जिसके अंडे मुर्गी के अंडों से कुछ बड़े होते हैं। |
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बत-चल :
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वि० [हिं० बात+चलाना] बकवादी। बक्की। स्त्री०=बात-चीत। |
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बत-छुट :
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वि० [हिं० बात+छूटना] बिना सोचे-समझे। अच्छी-बुरी सब तरह की बातें कह डालनेवाला। |
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बत-धर :
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वि० [हिं० बात+सं० धर=धारण करनेवाला] जो अपनी कही हुई बात या दिये हुए वचन का सदा पूरी तरह से पालन करता हो। |
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बत-बढ़ाव :
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पुं० [हिं० बात+बढ़ाव] १. बात बढ़ने अर्थात् झगड़ा खड़े होने की अवस्था या भाव। २. छोटी या तुच्छ बात को दिया जानेवाला विकट और विस्तृत रूप। |
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बत-बाती :
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स्त्री० [हिं० बात] १. बे-सिर पैर की बात। बकवाद। २. किसी से छेड़-छाड़ करने या घनिष्ठता बढ़ाने के लिए की जानेवाली बात-चीत। उदाहरण—कछुक अनूठे मिस बनाय ढिग आय करत बतबाती।—आनन्दघन। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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बतर :
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वि०=बदतर। |
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बत-रस :
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पुं० [हिं० बात+रस] बातों से मिलनेवाला आनन्द। |
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बत-रसिया :
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वि० [हिं० बात+रसिया] १. हर बात में रस लेनेवाला। २. जिसे बहुत बात-चीत करने का चस्का हो। बातों का शौकीन। |
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बतरान :
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स्त्री० [हिं० बतराना] बातचीत। |
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बतराना :
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अ० [हिं० बात+आना (प्रत्यय)] बातचीत। करना। उदाहरण—हम जाने अब बात तिहारी सूधे नहीं बतराति।—सूर। |
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बतरानि :
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स्त्री०=बतरान। बात-चीत। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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बतरावनि :
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स्त्री० [हिं० बतराना] १. बात-चीत। वार्तालाप। उदाहरण—‘ललित किसोरी’ फूल झरनि या मधुर-मधुर बतरावनि।—ललित किशोरी। २. बात-चीत करने का ढंग या प्रकार। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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बतरौहाँ :
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वि० [हिं० बात] [स्त्री० बतरौही] बहुत बातें करनेवाला। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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बतलाना :
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स०=बताना। अ०=बतराना। (बात-चीत करना)। |
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बत-वन्हा :
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पुं० [देश] एक तरह की नाव। |
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बताना :
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स० [हिं० बात+ना (प्रत्यय) या सं० वदन=कहना] १. कोई बात कहकर किसी को कोई जानकारी या परिचय कराना। जैसे—तुम्हारी नौकरी लगने की बात मुझे उसी ने बतायी थी। २. कोई कठिन काम या बात इस प्रकार दिखलाना या समझाना कि उससे अनजानों का ज्ञान या योग्यता बढ़े। जैसे—(क) गुरु जी ने अभी तुम्हें व्याकरण का वषय नहीं बताया है। (ख) नौकर ने मालिक को खर्च का हिसाब बताया। ३. किसी प्रकार का निर्देश या संकेत करना। जैसे—किसी की ओर उंगली दिखाकर बताना। ४. नाच-गाने आदि के प्रसंग में ऐसी मुद्राएँ बनाना जो गीत के भाव के अनुरूप या उनकी स्पष्ट परिचायक हों। जैसे—वह गाता (या नाचता) तो उतना अच्छा नहीं हैं, पर भाव बहुत अच्छा बताता है। मुहावरा—भाव बताना=किसी काम या बात के समय स्त्रियों के से हाव-भाव प्रदर्शित करना। ५. किसी को धमकाते हुए यह आशा प्रकट करना कि हम तुम्हारा अभिमान दूर कर देंगे या तुम्हारी बुद्धि ठिकाने कर देंगे। जैसे—अच्छा किसी दिन तुम्हें भी बताऊँगा। ६. दिखलाना। जैसे—बावली को आग बताई उसने ले घर में लगाई। (कहा० )। पुं० [सं० वर्तक=एक धातु] १. हाथ में पहनने का कड़ा। २. वह फटा-पुराना या साधारण कपड़ा जो पगड़ी बाँधने से पहले यों ही सिर पर इसलिए लपेट लिया जाता है कि बालों से पगड़ी गंदी या मैली न होने पावे। |
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बताशा :
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पुं०=बतासा। |
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बतास :
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स्त्री० [सं० बातास] १. बात के प्रकोप के कारण होनेवाला गठिया नामक रोग। क्रि० प्र०—घरना।—पकड़ना।२. वायु। हवा। |
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बतासना :
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अ० [हिं० बतास] हवा चलना या बहना। (पूरब)। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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बतासफेनी :
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स्त्री० [हिं० बतासा+फेनी] टिकिया के आकार की एक मिठाई। |
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बतासा :
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पुं० [हिं० बतास=हवा] १. एक प्रकार की मिठाई जो चीनी की चाशनी टपकाकर बनायी जाती है और जो फूल की तरह फूली हुई और बहुत हलकी होती है। २. एक प्रकार की छोटी आतिशबाजी जो मिट्टी के कसोरे में मसाला बनायी जाती है। ३. पानी का बुलबुला। |
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बतासी :
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स्त्री० [देश] एक प्रकार की कालापन लिए हुए खैरे रंग की चिड़िया जिसकी आँख की पुतली गहरी-भूरी चोंच काली और पैर ललछौह होते हैं। |
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बतिया :
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स्त्री० [सं० वर्तिका, प्रा० बत्तिआ=बत्ती] सब्जी के काम में आनेवाला कोई छोटा कच्चा ताजा हरा फल। जैसे—कद्दू या बैगन की बतिया। स्त्री०=बात। (यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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बतियाना :
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अ० [हिं० बात] बातचीत करना। |
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बतियार :
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स्त्री० [हिं० बात] बातचीत। |
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बतीसा :
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पुं० [हिं० बत्तीस] [स्त्री० अल्पा० बत्तीसी] १. बत्तीस वस्तुओं का समाहार या समूह। २. बत्तीस दवाओं और मेवों के योग से बनाया हुआ लड्डू या हलवा जो प्रसूता को पुष्टि के लिए खिलाया जाता है। ३. दाँत से काटने का घाव या चिन्ह। |
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बतीसी :
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स्त्री०=बत्तीसी। |
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बतू :
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पुं०=कलाबत्तू। |
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बतोला :
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पुं० [हिं० बात+ओला (प्रत्यय)] १. धोखा देने के उद्देश्य से कही जानेवाली बात। २. झांसा। मुहावरा—बतोले बनाना=(क) बातें बनाना। (ख) भुलावा देना। |
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बतौर :
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अव्य० [अ०] १. (किसी की) तरह पर। रीति से। तरीके पर। २. के सदृश। के समान। |
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बतौरी :
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स्त्री० [?] रसौली। |
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बतौल-कुंती :
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स्त्री० [हिं० बात] कान में बातचीत करने की नकल जो बंदर करते हैं। (कलंदर)। |
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बत्त :
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स्त्री०=बात। |
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बत्तक :
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स्त्री०=बत्तख। |
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बत्तर :
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वि०=बदतर। |
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बत्तरी :
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स्त्री०=बात।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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बत्ता :
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पुं० [सं० बर्त्तक] सरकंडे के वे मुट्ठे जो छाजन के छप्पर के अगले भाग में बाँधे जाते हैं। |
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बत्तिस :
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वि०=बत्तीस। |
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बत्ती :
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स्त्री० [सं० वर्ति, प्रा० बत्ति] १. प्रकाश के निर्मित जलाया जानेवाला सूत, रूई, कपड़े आदि का बटा हुआ लम्बोतरा लच्छा जो तेल आदि से भरे हुए दीए में रखा जाता है। मुहावरा—बत्ती चढ़ाना=शमादान में मोमबत्ती लगाना। (बत्ती जलाना=अँधेरा होने पर प्रकाश के लिए दीपक जलाना। (किसी चीज में) बत्ती लगाना-पूरी तरह से नष्ट-भ्रष्ट करना। जैसे—वह लाखों रुपए की सम्पत्ति में बत्ती लगाकर कंगाल हो गया। ३. दीपक। चिराग। ४. रोशनी प्रकाश। मुहावरा—बत्ती दिखाना=प्रकाश दिखाना। ५. लपेटा हुआ चीथड़ा जो किसी वस्तु में आगे लगाने के काम में लाया जाय। फलीता। पलीता। ६. बत्ती के आकार-प्रकार की कोई गोलाका लम्बी चीज। जैसे—घाव में भरने की बत्ती लाह की बत्ती। ७. छाजन में लगाने का फूस आदि का पूला। ८. कपड़े की वह लम्बी धज्जी जो घाव में मवाद साफ करने के लिए भरते हैं। ९. सौंफ आदि पर गंध-द्रव्य का ज्वलनशील पदार्थ लपेटकर बनायी जानेवाली बत्ती जो पूजन यादि के समय जलायी जाती है। जैसे—अगरबत्ती, धूपबत्ती, मोमबत्ती। १॰. पगड़ी या चीरे का ऐंठा या बटा हुआ कपड़ा। ११. कपड़े के किनारे का वह भाग जो सीने के लिए मरोड़कर बत्ती के रूप में लाया जाता है। |
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बत्तीस :
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वि० [सं० द्वाविंशत, प्रा० बत्तीसा] गिनती या संख्या में जो तीस से दो अधिक हो। पुं० उक्त की सूचक संख्या जो इस प्रकार (३२) लिखी जाती है। |
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बत्तीसा :
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पुं०=बतीसी। |
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बत्तीसी :
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स्त्री० [हिं० बत्तीस] १. एक ही तरह की बत्तीस चीजों का समूह। २. मनुष्य के मुँह से ३२ दाँतों का समूह। मुहावरा—बत्तीसी खिलना=मुँह पर स्पष्ट रूप से हँसी दिखायी देना। (किसी की) बत्तीसी झाड़ना=इतना मारना कि सब दाँत टूट जाएँ। बत्तीसी दिखाना=निर्लज्जतापूर्वक हँसना। बत्तीसी बजना=सरदी के कारण दाँतों का काँपकर कटकट शब्द करना। |
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बत्रीस :
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वि० पुं०=बत्तीस। |
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बतजामी :
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स्त्री० [फा०] कुप्रबंध। अव्यवस्था। |
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