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विविध >> मनोविश्लेषण मनोविश्लेषणसिगमंड फ्रायड
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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद
यह जान जाता है कि शरीर के वहुत-से अन्य भागों में भी कैसी संवेदकता है, और
उनसे भी वैसा सुखदायक संवेदन मिल सकता है, और उनसे वह जननेन्द्रियों का कार्य
लेता है। तो, यह कहा जा सकता है कि वालक में बहुरूपी (काम) विकृति1 होती है,
और यदि उसमें इन सब आवेगों के लेश ही मिलते हैं, तो भी, इसका एक ओर तो यह
कारण है कि इस समय वे उस रूप से कम तीव्र रूप में होते हैं, जो वे बाद के
जीवन में हासिल कर लेते हैं, और दूसरी ओर शिक्षा बालक की सब यौन
अभिव्यक्तियों को तरन्त और प्रबलता से अवरुद्ध कर देती है, अर्थात दबा देती
है। इस अवरोध को एक सिद्धान्त का रूप दे दिया जाता है; क्योंकि बड़ी आयु के
लोग इनमें से कुछ अभिव्यक्तियों को नज़रन्दाज़ करने की कोशिश करते हैं, और
कुछ का गलत अर्थ लगाकर वे उन्हें उनके यौन स्वरूप से वंचित करने की कोशिश
करते हैं, यहां तक कि अन्त में सारी बात का पूरी तरह निषेध किया जा सकता है।
ये प्रायः वही लोग होते हैं जो पहले छोटे बच्चों के यौन नटखटपन की निन्दा
करते हैं, और उसके बाद अपने घर बैठकर उन्हीं बच्चों की यौन-शुद्धता का
जोर-शोर से मण्डन करते हैं। जब बच्चों को आजाद छोड़ दिया जाए या जब उन्हें इस
ओर बहकाया जाए तब उनमें काफी मात्रा में विकृत यौन व्यापार दिखाई देते हैं।
बड़े लोगों को इसे बहुत गम्भीरता से ग्रहण न करना और इसे 'बच्चों का खेल'
समझना ठीक ही है, क्योंकि बच्चों को बड़ों और पूरी तरह ज़िम्मेदार लोगों के
नैतिक नियमों से नहीं नापा जा सकता। तो भी ये चीजें होती अवश्य हैं, और इस
रूप में उनका महत्त्व भी है कि उनसे जन्मजात शारीरिक प्रवृत्तियों का पता
चलता है, और उनसे बाद में होने वाले परिवर्धन उत्पन्न और घोषित होते हैं।
उनसे हममें बच्चे के यौन जीवन का अन्तर्दर्शन होता है, और इस तरह सारी
मानव-जाति के यौन जीवन का अन्तर्दर्शन होता है। इसलिए यदि हमें अपने स्वप्नों
के विपर्यासों के पीछे ये सब विकृत इच्छाएं दिखाई देती हैं तो इसका यही अर्थ
है कि इस बात में भी स्वप्न पूरी तरह प्रतिगामी होकर शैशवीय अवस्था में आ गए
हैं।
इन निषिद्ध इच्छाओं में भी विशेष महत्त्व निषिद्ध सम्भोग की इच्छाओं अर्थात्
उन इच्छाओं को देना चाहिए जो माता-पिता या भाई-बहिनों के साथ मैथुन करने की
दिशा में होती हैं। आप जानते हैं कि मनुष्य समाज ऐसे मैथुन को कितनी घृणा की
दृष्टि से देखता है, या कम-से-कम घृणा की दृष्टि से देखने का दिखावा करता है,
और इसको रोकने पर कितना बल दिया जाता है। निषिद्ध सम्भोग की इस भयंकरता का
कारण बताने के बड़े अजीबो-गरीब यत्न किए गए। कुछ लोगों ने यह मान लिया है कि
प्रकृति ने स्पीशीज़ को कायम रखने के लिए मन में स्वयं ये प्रतिषेध की
भावनाएं पैदा करके एक व्यवस्था कर दी है क्योंकि अन्तरभिजनन2, अर्थात् निकट
सम्बन्धियों में विवाह, से मूल वंश का ह्रास हो जाएगा। कुछ लोगों ने इस बात
पर बल दिया है कि बिलकुल बचपन से बहुत अधिक निकटता के कारण उन व्यक्तियों के
प्रति यौन इच्छा दूर हो गई है। परन्तु इन दोनों अवस्थाओं में निषिद्ध सम्भोग
से आप ही आप रक्षा हो जाती है, और हमें सख्त निषेध लागू करने की आवश्यकता समझ
में नहीं आती, जिनसे प्रबल इच्छा का सा संकेत मिलता है। मनोविश्लेषण के
अनुसंधानों ने बिलकुल निश्चित रूप से सिद्ध कर दिया है कि असल में निषिद्ध
प्रेम की इच्छा सबसे पहले होती है, और यह इच्छा सदा होती है, और इसके प्रति
विरोध बाद में ही दिखाई देता है, और इस विरोध का कारण उस व्यक्ति के
मनोविज्ञान में ढूंढ़ने की आवश्यकता नहीं। बाल मनोविज्ञान पर विचार करने से
स्वप्नों को समझने के विषय में जो परिणाम निकले हैं, उनका सारांश यह है :
हमें पता चला है कि भूले हुए बाल्यकाल के अनुभवों की सामग्री न केवल स्वप्न
की पहुंच में होती है, बल्कि बालक का मानसिक जीवन उसकी सब विशेषताओं, उसके
अहंकार, निषिद्ध सम्भोग के लिए उसके वस्तु-चुनाव को साथ लिए हुए स्वप्न हर
रात हमें इस बचपन की अवस्था में लौटा ले जाते हैं। इस कथन से इस विश्वास की
पुष्टि होती है कि अचेतन शैशवीय मानसिक जीवन ही है, और इससे यह आपत्ति योग्य
भावना, कि मनुष्य की प्रकृति में इतनी दुष्टता और बुराई दिखाई देती है, कुछ
कम हो जाती है; क्योंकि यह भयंकर दुष्टता और बुराई सिर्फ वही चीज़ है जो
मानसिक जीवन में मूल आदिकालीन और बचपन का अंश है, जो हमें बच्चों में कार्य
करता दिखाई देता है. जिसकी हम अंशतः इसलिए उपेक्षा कर देते हैं कि वह इतने
छोटे पैमाने पर होता है, और अंशतः इसलिए उपेक्षा कर देते हैं कि हम बच्चों
में आचार सम्बन्धी ऊंचे मानदण्ड की आशा नहीं करते। इस बचपन की अवस्था में
लौटकर हमारे स्वप्न हमारी बुराई और दुष्टता को बाहर लाते हुए दिखलाई देते
हैं, पर यह दिखलावा धोखे में डालने वाला है हालांकि हम इससे भयभीत हो गए हैं,
हम उतने बुरे नहीं हैं जितने स्वप्न के निर्वचन के कारण मालूम होने लगते हैं।
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1. Polymorphous perversion
2. In breeding
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