गजलें और शायरी >> संभाल कर रखना संभाल कर रखनाराजेन्द्र तिवारी
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तुम्हारे सजने-सँवरने के काम आयेंगे, मेरे खयाल के जेवर सम्भाल कर रखना....
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सदा वापस पलट कर आ रही है
सदा वापस पलट कर आ रही है।
मेरी आवाज़ उस तक जा रही है।।
पता है हमको दुनिया की हक़ीक़त,
ये दुनिया है जो धोख़ा खा रही है।
उसे जाकर बरसना है कहाँ पर,
हवा बादल को ये समझा रही है।
शिकायत क्या करें जब तश्नगी ख़ुद,
हमारे वास्ते... दरिया रही है।
हमेशा शायरी के साथ दुनिया,
हमारी सोच का हिस्सा रही है।
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