गजलें और शायरी >> संभाल कर रखना संभाल कर रखनाराजेन्द्र तिवारी
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तुम्हारे सजने-सँवरने के काम आयेंगे, मेरे खयाल के जेवर सम्भाल कर रखना....
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वक़्त आया, कई मौसम मेरे आँगन लेकर
वक़्त आया, कई मौसम मेरे आँगन लेकर।
यानी फागुन, कभी पतझर, कभी सावन लेकर।।
कोई खु़श्बू सा महकता है, मेरे दिल में भी,
अपनी यादों के, खनकते हुए कंगन लेकर।
अपनी सूरत में, तेरी देख ली सूरत जबसे,
उम्र भर बैठा रहा, हाथ में दरपन लेकर।
रात भर मुझको सितारे नहीं सोने देते,
सुब्ह आ जाती है, फिर इक नई उलझन लेकर।
अब न ख्व़ाबों से, खि़लौनों से, बहल पाऊँगा,
वक़्त गुम हो गया, मुझसे मेरा बचपन लेकर।
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