कुसुम कुमारी - देवकीनन्दन खत्री Kusum Kumari - Hindi book by - Devkinandan Khatri
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कुसुम कुमारी

देवकीनन्दन खत्री

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :212
मुखपृष्ठ :
पुस्तक क्रमांक : 8523
आईएसबीएन :0

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कुसुम कुमारी पुस्तक का किंडल संस्करण...

Kusum Kumari - A Hindi Ebook By Devkinandan Khatri

किंडल संस्करण


ठीक दोपहर का वक्त और गर्मी का दिन है। सूर्य अपनी पूरी किरणों का मजा दिखा रहे हैं। सुनसान मैदान में दो आदमी खूबसूरत और तेज घोड़ों पर सवार साये की तलाश और ठंडी जगह की खोज में इधर-उधर देखते घोड़ा फेंके चले जा रहे हैं। ये इस बात को बिलकुल नहीं जानते कि शहर किस तरफ है या आराम लेने के लिए ठंडी जगह कहां मिलेगी। घड़ी-घड़ी रूमाल से अपने मुंह का पसीना पोंछते और घोड़ा को एड़ लगाते बढ़े जा रहे हैं।

इन दोनों में से एक की उम्र अठारह या उन्नीस वर्ष की होगी, दिमागदार खूबसूरत चेहरा धूप में पसीज रहा है, बदन की चुस्त कीमती पोशाक, पसीने से तर हो रही है, जड़ाऊ कब्जेवाली इसकी तलवार फौलादी जड़ाऊ म्यान के सहित उछल-उछलकर घोड़े के पेट से टक्कर मारती और चलने में घोड़े को तेज करती जाती है। इसका घोड़ा भी जड़ाऊ जीन से कसा और कीमती गहनों से भरा, अपने एक पैर की झांझ की आवाज पर मस्त होकर चलने में सुस्ती नहीं कर रहा था। ऐसे बांके बहादुर खुशरू दिलावर जवान को जो देखे वह जरूर यही कहे कि किसी राजा का लड़का है और शायद शिकार में भूला हुआ भटक रहा है।

इसका साथी दूसरा शेरदिल भी जो इसके साथ-साथ अपने तेज घोड़े को डपेटे चला जा रहा है, खूबसूरती दिलावरी साज और पोशाक में बेनजीर मालूम होता है, फर्क इतना ही है कि इसको देखनेवाला यह कहने से न चूकेगा कि यह पहले बहादुर राजकुमार का वजीर या दीवान है, जो ऐसे वक्त में अपने मालिक का जी जान से साथ दे रहा है।
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