जंगल - अमृत राय Jungle - Hindi book by - Amrit Rai
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जंगल

अमृत राय

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ :
पुस्तक क्रमांक : 8481
आईएसबीएन :0

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जंगल पुस्तक का किंडल संस्करण...

Jungle - A Hindi EBook By Amrit Rai

किंडल संस्करण


जैसे रात एक चमगादड़ का नाम है, सबेरा एक कुत्ते का नाम है। बदरंग, मटमैला, भूरा-सा एक कुत्ता, बहुत चालाक, बहुत चुस्त, अपनी मेधा के सहारे सड़कों पर पलनेवाला। लाठी आप उसे नहीं मार सकते, गोली आप उसे नहीं मार सकते। आँख खुलते ही वह हो जाता है और सारा दिन आप उसी के पीछे लठ लिये घूमते रहते हैं। बहुत ऐबी कुत्ता है।

एक दवा उसकी भी है। आँख न खोलो। जब तक आँख न खोलो सबेरा नहीं होता। मैं बड़ी देर तक आँख नहीं खोलता इसलिए मेरा सबेरा जल्दी नहीं होता। लीना झट आँख खोल देती है इसलिए झट से उसका सबेरा हो जाता है।

लीना मेरी बीवी का नाम है बाप का दिया हुआ नाम तो नलिनी है, पर मैंने कहा ज़िन्दगी यों ही क्या कम अजीरन है, मैंने उसे लीना बना लिया। बाद को मैंने देखा कि नाम बड़ा सार्थक है, क्योंकि लीना हर समय अपने चूल्हे-चौके में लीन रहती है या उस बच्चे में जो कि उसको नहीं होता। लीना समझती है इसमें सारा दोष उसका है। कितनी ही बार डाक्टरी जाँच करवा चुकी, अब आये दिन किसी पीर बाबा और किन्ही स्वामी जी के यहाँ चढ़ावा लेकर पहुँची रहती है। मुझसे कुछ कहने की हिम्मत नहीं। एकाध बार इशारा किया तो मैंने डपट दिया। और करता भी क्या। उसका दिल तोड़ना मुझे मंजूर न था। सबको एक न एक शग़ल चाहिए, लीना के लिए यही सही। वक़्त कटने से मतलब है। अपने आपरेशन की बात कहकर क्यों अपनी और उसकी ज़िन्दगी मुहाल करूँ। ससुरजी आकर पाँच सौ खरी-खोटी सुनायें, शादी के पहले यह बात क्यों नहीं बतलायी। पूछिए, शादी के पहले आपको यह बात बतला देता तो आप अपनी बिटिया मुझको देते ? इसीलिए नहीं बतलायी। पता नहीं औरत-मर्द की शादी में यह बच्चे कहाँ से टपक पड़ते हैं, उनसे क्या लेना-देना। एक मर्द है, वह रोज़ बाज़ार में नहीं घूम सकता, उसे अपने घर में एक औरत चाहिए।
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