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कहानी संग्रह >> मोहन चोपड़ा की श्रेष्ठ कहानियाँ मोहन चोपड़ा की श्रेष्ठ कहानियाँसुनील चोपड़ा (संपादक)
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हैडमास्टर कहने लगा, ‘‘हमारी तरह के इन प्राइवेट स्कूलों में कोई हमेशा पक्का नहीं होता। मेरी अपनी बात ले लो, आज मैं इस पोज़ीशन में हूँ, न मालूम कल मैनेजिंग कमेटी में कैसी हवा चले और मैं बाहर कर दिया जाऊँ।’’
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