जाग उठे ख्वाब कई - साहिर लुधियानवी Jaag Uthe Khwab Kayi - Hindi book by - Sahir Ludhianvi
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जाग उठे ख्वाब कई

साहिर लुधियानवी

प्रकाशक : पेंग्इन बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2010
पृष्ठ :228
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 7699
आईएसबीएन :9780143068709

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साहिर लुधियानवी की श्रेष्ठ और लोकप्रिय रचनाओं का हिंदी में अब तक का सबसे बड़ा और प्रामाणिक संचयन

Jaag Uthe Khwab Kayi - A Hindi Book - by Sahir Ludhianvi

जाग उठे ख़्वाब कई में साहिर लुधियानवी की दोनों तरह की रचनाएं शामिल हैं: एक तो वे नज़्म जो साहित्यिक दृष्टि से क्लासिक का दर्जा पा चुकी हैं, दूसरे वे दिलकश गीत, जिनके लिए साहिर आज भी हिंदी गीतों के प्रेमी और रसिया लोगों के बीच गहरे अनुराग, प्यार और आदर के साथ याद किए जाते हैं।

इंसानी जज़्बातों के अदभुत चितेरे, साहिर लुधियानवी की गिनती महान दक्षिणी एशियाई शायरों में होती है। उनके योगदान को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1971 में पद्मश्री से सम्मानित किया। 1976 में उन्हें सोवियत लैंड नेहरू अवॉर्ड भी मिला। लेकिन यह विडंबना ही है कि अनेक पुरस्कारों-सम्मानों से सम्मानित इस रूमानी शायर-गीतकार के प्यार को प्यार नहीं मिला। फिर भी हर प्यार करने वाले दिल को अपने नाजुक और जज़्बाती क्षणों में साहिर के गीत अनायास याद आते हैं। यक़ीनन यह किताब साहिर को उनके चाहने वालों और साहित्यप्रेमियों के बीच मुकम्मल तौर पर पेश करेगी।

‘साहिर लुधियानवी का दायरा बहुत बड़ा है। ये पहली बार हुआ था कि शायर ने फ़िल्म मीडियम को नहीं अपनाया, बल्कि मीडियम ने शायर को अपना लिया। वो जैसा लिखता था, वैसा ही रहा...’

–गुलज़ार

‘‘साहिर के गानों ने मुझे दिशा दी है। अपनी आवाज़ मैंने उनके गीतों में पाई थी।’

–अनुराग कश्यप

Jaag Uthe Khwab Kayi, Sahir Ludhianvi
आवरण डिज़ाइन: पूजा आहूजा


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