चार यारों की यार - सुशील कुमार सिंह Char Yaron Ki Yar - Hindi book by - Susheel Kumar Singh
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चार यारों की यार

सुशील कुमार सिंह

प्रकाशक : वाणी प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2008
पृष्ठ :95
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 7013
आईएसबीएन :978-81-8143-991

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स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के कई पहलुओं को अंकित करता नाटक...

Char Yaron Ki Yar - A Hindi Book - by Susheel Kumar Singh

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

प्रसिद्ध नाटककार सुशील कुमार सिंह ने जहाँ स्पष्ट रूप से राजनैतिक नाटक रचे हैं, वहीं सामाजिक स्थितियों को भी बड़े साहस के साथ अपने नाटकों में उकेरा है। उनका चर्चित और बोल्ड नाटक ‘चार यारों की यार’ मुख्य पात्र बिन्दिया की त्रासदी के गिर्द बुना गया है। बिन्दिया की कहानी इस देश की अनेकानेक औरतों की व्यथा-कथा है :

‘‘दोष मैं किसे दूँ, सब भाग्य का ही खेल है। यदि मैं अपने पहले पति को छोड़ कर दूसरा ब्याह न रचाती... चौंकिए मत, कोई नयी बात नहीं कह रही हूँ... दूसरा ब्याह करना कोई गुनाह तो नहीं है और वह भी तब जबकि किसी स्त्री का पति हर रोज़ नशे में धुत्त हो कर लौटे और अपनी पत्नी को बेज़ुबान जानवर समझ बेरहमी से पीटना शुरू कर दे... लात, घूँसे, थप्पड़ या जो कुछ भी हाथ में आ जाये-जलती हुई लकड़ी, जूते या लोहे की रॉड... कब तक सहती-आखिर कब तक... ’’
लेकिन दूसरे ब्याह से भी बिन्दिया को वह सुख-चैन नहीं मिलता जिसकी वह उम्मीद लगाये बैठी थी। यहीं से बिन्दिया की भटकन की कहानी शुरू होती है और उसका अन्त उसी के हाथों दूसरे पति की हत्या में होता है। इस व्यथा-कथा को सुशील कुमार सिंह ने बड़ी बेबाकी और हमदर्दी के साथ नाटक में अंकित किया है।

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