कहावतों की कहानी मुहावरों की जुबानी-2 - पाण्डेय सूरजकान्त शर्मा Kahavaton Ki Kahani Muhavaron Ki Jubani-2 - Hindi book by - Pandey Surajkant Sharma
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कहावतों की कहानी मुहावरों की जुबानी-2

पाण्डेय सूरजकान्त शर्मा

प्रकाशक : इतिहास शोध-संस्थान प्रकाशित वर्ष : 2003
पृष्ठ :30
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 6258
आईएसबीएन :81-8071-051-7

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प्रस्तुत है कहावतों की कहानी मुहावरों की जुबानी

Kahavaton Evam Muhavaron Ki Kahani A Hindi Book by Pandey Surajkant Sharma

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

दूसरों के लिए गड्ढा खोदना


पूरी कहावत

दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाला स्वयं उसमें गिरता है

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संस्कृत : परस्य विषयं विचिन्तयेप्राप्नुयात्स कुमति स्वयं हि तत् पूतना हरिवधार्थ भाययौ प्रापसैव वधमात्मनः-
 अग्रेजीः who so digs a pitch shall fall therein.
अर्थ : जो दूसरों का बुरा चाहता है उसी का बुरा होता है।
भाव : किसी को हानि न पहुँचाओ, इससे  तुम्हारी ही हानि होगी।
कहानीकार की ओर से – बच्चों ! इस कहावत का अर्थ तुम समझ गये होगे। इसमें छिपी सरल शिक्षा यह है कि जो दूसरों का नुकसान करना चाहता है स्वयं उसे ही नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति का वही हाल होता है जो उस गीदड़ का हुआ जिसने हिरण के लिए गड्ढ़ा खोदा था, आओ, मैं तुम्हें उस दुष्ट गीदड़ और भोले हिरन की कहानी सुनाता हूँ जिसके आधार पर ही यह कहावत बनी होगी।

दूसरों के लिए गडढा खोदना


सुन्दर वन एक अत्यंत सुन्दर वन था। उसमें नाना प्रकार के पशु पक्षी निवास करते थे। उस वन के कदलीकुञ्ज मुहल्ले में एक हिरण रहता था। वह बहुत सीधा सरल और दयालु था।

उसी के पड़ोस में एक गीदड़ भी रहता था। वह बहुत धूर्त, मक्कार और मतलबी था। पर ऐसे लोगों के सींग थोड़े ही होते हैं। बाहर से वह बहुत शरीफ लगता था। हिरन बेचारा दिन-भर मेहनत करके अपना भोजन जुटाता था। पर गीदड़ आलसी और कामचोर था। वह मरे हुए जानवरों या शेर की जूठन खाकर अपने पेट की आग बुझाता था।


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