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इतिहास और राजनीति >> भारत की एकता का निर्माण भारत की एकता का निर्माणसरदार पटेल
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स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत की एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा देश की जनता को एकता के पक्ष में दिये गये भाषण
(१) कलकत्ता
३ जनवरी १९४८
बहनों और भाइयों,
बहुत दिनों से आप लोगों से
मिलने की ख्वाहिश थी। आपका प्रेम और मुहब्बत देख मेरा दिल भर आया है। चन्द
दिन हुए, हमारे नेता हमारे प्राइम मिनिस्टर साहब भी इधर आए थे। उस दिन भी
बहुत लोग जमा हो गए और वह अपने दिल की जो बातें आपको सुनाना चाहते थे, उस
का मौका रह गया। आप लोग कलकत्ता में सब चीजें बहुत बड़े पैमाने पर करना
चाहते हैं। आज भी आप लोग इतनी बड़ी तादाद में यहाँ आए है। इतनी बड़ी भीड़ को
सुनाना भी मुश्किल हो जाता है। यदि पास और दूर के सब लोग शान्त हो जायँ,
तो चन्द बातें मैं आपको सुनाना चाहता हूँ। क्योंकि अब हमें ऐसा मौका बहुत
कम मिलता है कि हम लोग आपके पास आकर आपको अपने दिल की बात कह सकें।
कहने की बातें तो बहुत हैं,
क्योंकि बंगाल के ऊपर, हिन्दुस्तान के ऊपर बहुत सी मुसीबतें गुजरीं हैं।
एक बात हम और आप सब चाहते थे कि हिन्दुस्तान आजाद हो जाए। तो हमारा देश तो
आजाद हो गया। यहाँ जो परदेसी हुकूमत थी, वह इधर से हट गई। वह तो बहुत
अच्छा हुआ। हमारा और आपका जिन्दगी भर का यह काम था कि हमारा मुल्क आजाद
हो। हिन्दुस्तान आज आजाद हो गया। एशिया भी अब आजाद होने वाला है। चन्द
दिनों में, बल्कि कल ही बर्मा भी आजाद हो जाएगा। लेकिन परदेसियों के हट
जाने से जो आजादी हमें मिली है, क्या सचमुच वह वही आजादी है, जो आजादी हम
चाहते थे, उसका हिसाब हमें लगाना चाहिए। क्योंकि खाली परदेसियों को हटा कर
उनकी जगह पर हम लोग बैठ जाएँ, तो उससे हमारा काम नहीं चलेगा। तो अब हमें
क्या करना चाहिए? अपनी स्वाधीनता को पूर्ण और अपने मन के मुताबिक बनाने के
लिए हमें तैयारी करनी चाहिए। वह तैयारी क्या हो, यही मैं आपके सामने रखना
चाहता हूँ।
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