विश्व की महिला अन्तरिक्ष-यात्री - काली शंकर Vishwa ki Mahila Antariksh-yatri - Hindi book by - Kali Shankar
लोगों की राय

जीवनी/आत्मकथा >> विश्व की महिला अन्तरिक्ष-यात्री

विश्व की महिला अन्तरिक्ष-यात्री

काली शंकर

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :228
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 618
आईएसबीएन :9788170286232

Like this Hindi book 6 पाठकों को प्रिय

84 पाठक हैं

दुनिया की समस्त महिला अन्तरिक्ष-यात्रियों के जीवन और उपलब्धियों का विस्तृत परिचय....

Vishwa ki Mahila Antariksh-yatri - A hindi Book by - Kali Shankar विश्व की महिला अन्तरिक्ष-यात्री - काली शंकर

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

1950 के दशक के प्रारम्भ में पूर्व-सोवियत संघ ने जब अन्तरिक्ष युग की शुरूआत की थी, तब लोगों को यह अजूबा ही लगा था कि जीता-जागता इन्सान अन्तरिक्ष में जा सकता है और वापस भी आ सकता है। शीघ्र ही वह क्षण भी आया जब वेलेन्तिना तेरेस्कोवा नाम की रूसी महिला ने स्पेन सूट पहन कर अन्तरिक्ष की यात्रा की और विश्व की प्रथम महिला अन्तरिक्ष-यात्री का कीर्तिमान बनाया। फिर तो पूरी दुनिया में महिलाओं को आन्तरिक्ष में भेजने की स्पर्धा-सी चल पड़ी और अब तक 33 अमरीकी, 3 रूसी, 2 कैनेडियाई तथा एक-एक फ्रांसीसी, ब्रिटिश, जापानी अर्थात् 41 महिलाएँ अन्तरिक्ष यात्रा कर चुकी हैं। और अन्तरिक्ष अनुसन्धान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। और अन्तरिक्ष अनुसंधान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं। उन सबके जीवन और उपलब्धियों का सचित्र परिचय बहुत ही रोचक, मार्मिक और प्रेरणाप्रद शैली में।

दुनिया की समस्त महिला-अन्तरिक्ष यात्रियों के जीवन और उपलब्धियों का विस्तृत परिचय बहुत ही रोचक, मार्मिक और प्रेरणाप्रद शैली में सभी महिला अन्तरिक्ष यात्रियों की जीवनी के साथ-साथ उनके चित्र तथा यात्रा-विवरणों की तालिकाएँ भी। विश्व की पहली महिला अन्तरिक्ष यात्री वेलेन्तिना तेरेस्कोवा से लेकर अन्तरिक्ष यात्रा के दौरान अपना जीवन बलिदान कर देने वाली भारतीय युवती कल्पना चावला तक सभी 41 महिला अन्तरिक्ष यात्रियों की रोमांचक दास्तान, जो महत्त्वपूर्ण सन्दर्भ-पुस्तक तो है ही, जीवन-निर्माण सम्बन्धी प्रेरक पुस्तक भी है !

 

आभार

 

 

अपनी इस कृति ‘‘विश्व की महिला अन्तरिक्ष यात्री’’ को मैं सादर सम्मान के साथ समर्पित करता हूँ-
1 अपने माता-पिता को जो मुझे इस धरती पर लाये।
2. माँ स्व. राजकुमारी को जिनकी असामयिक मृत्यु ने मातृ-स्नेह से वंचित ऱखा।
3. चाची स्व. लीलावती को जिन्होंने मातृ-स्नेह के कारुणिक अभाव की पूर्ति की।
4. पिता स्व. चन्द्रमोहन शुक्ला को जो धनाभाव के कारण समुचित शिक्षा न पा सके
5. ज्येष्ठ भ्राता स्व. टी. एस. शुक्ला को जिनके महान आदर्शों की छाँव तले मैं बड़ा हुआ।
6. जन्म भूमि रायबरेली जिले के नीबी गाँव की प्रायमरी पाठशाला को जहाँ से मेरी शिक्षा प्रारंभ हुई तथा रुड़की विश्वविद्यालय को जहां पर मेरी शिक्षा समाप्त हुई।
7. धर्मपत्नी श्रीमती गीता शुक्ला को जिनकी प्रेरणा से इस-जटिल अंतरिक्ष विषय को मैं सरल हिन्दी भाषा में लिख सका।

 

लेखक

 

आन्तरिक्ष अन्वेषण में
महिलाओं का योगदान

 

 

नारी एक माँ भी है, बेटी भी है पत्नी भी है और बहन भी है तथा उसमें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में पुरुषों के साथ कंधा-से-कंधा मिलाकर चलने की क्षमता है। अन्तरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में महिलाएँ अपनी विशिष्ट संरचना के कारण अधिक अच्छी भूमिका निभा सकती हैं। चाहे इसे स्वीकारा जाए अथवा नहीं, अन्तरिक्ष अन्वेषण में महिलाओं ने पुरुषों के समान ही प्रदर्शन किया है। अन्तरिक्ष के सन्दर्भ में महिलाओं की पुरुषों की तुलना में कुछ विशिष्टताएँ हैं। अपने स्वाभाविक गुण के कारण महिलाएँ कष्ट, गर्मी और अन्तरिक्ष यान के कम्पन पुरुषों की अपेक्षा अधिक सुगमता से झेल सकती हैं। महिलाएं अन्तरिक्ष के विकिरण से कम प्रभावित होती हैं। 120 पौंड की महिला 160 पौंड के पुरुष की तुलना में कम आक्सीजन का उपयोग करती है तथा इसके साथ-साथ महिलाओं का कम भार अन्तरिक्ष यात्रा के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा एक और बड़े महत्त्व की बात है और वह यह है कि महिलाएँ बोरिंग वाले कार्यों को पुरुषों की तुलना में लम्बे अर्से तक कर सकती हैं।

जहाँ तक फिजियोलोजी का प्रश्न है अल्प अवधि के अन्तरिक्ष मिशनों में पुरुषों और महिलाओँ दोनों का ही प्रदर्शन अच्छा रहा है। लेकिन जहाँ तक लम्बी अवधि की अन्तरिक्ष उडानों का प्रश्न है उसमें महिलाओं के पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि बहुत कम महिलाएं ही अन्तरिक्ष में लम्बे अर्से के लिए गयीं, जैसे शैनन ल्युसिड। इसलिए महिलाओं के ऊपर लम्बी उड़ानों के प्रभावों का फिजियोलोजिकल विश्लेषण अभी नहीं किया जा सकता है। फिजियोलोजिकल फ्रान्ट में अन्तरिक्ष में आइसोलेशन एवं एकान्तवास में रहने के विषय पर मानवीय व्यवहार के मद्देनजर रखते अनेक अध्ययन और विश्लेषण किए गये हैं तथा ये विश्लेषण बताते हैं कि महिलाओं और पुरुषों का सयुंक्त अन्तरिक्ष यात्री दल आप्टिमम परफारमैन्स प्रदान कर सकता है-मिशन की सफलता में।

आज समाज का प्रत्येक व्यक्ति यह स्वीकार करता है कि महिलाओं ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में-चाहे इंजीनियरिग हो अथवा मेडिकल क्षेत्र हो; शिक्षा का क्षेत्र हो; अथवा राजनीति हो, एक महत्त्वपूर्ण और सकारात्मक भूमिका निभाई है। महिलाओं ने ओलम्पिक में अनेक मेडल जीते हैं और अपने-अपने देशों का नाम ऊँचा किया है। इसी के साथ जब बात महिलाओं के सन्दर्भ में विभिन्न क्षेत्रों की आती है तो उसमें अन्तरिक्ष अन्वेषण का भी क्षेत्र आता है। अन्तरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में महिलाओं ने काफी कार्य किए हैं। अब तक (जून 2004 के अन्त तक) विश्व के 436 अन्तरिक्ष यात्री अन्तरिक्ष में जा चुके हैं। इन 436 अन्तरिक्ष यात्रियों में 41 महिला अन्तरिक्ष यात्री हैं।

41 महिला अन्तरिक्ष यात्रियों में 3 महिला अन्तरिक्ष यात्री रूस/ भूतपूर्व यू. एस. आर. की हैं, 33 महिला अन्तरिक्ष यात्री अमरीका की हैं तथा बाकी महिला अन्तरिक्ष यात्री कनाड़ा की हैं एक महिला अन्तरिक्ष यात्री फ्रांस की, एक जापान की, तथा एक बिट्रेन की हैं। आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक अन्तरिक्ष में जाने वाली अमरीकी महिलाएं थीं। एक सांख्यकीय विश्लेषण के आधार पर सन 1981 से सन् 1998 तक अमरीकी अतंरिक्ष संस्था नासा ने स्पेस शटल की 94 उड़ानें सम्पन्न कराईं जिसमें 57 उड़ानों (अर्थात 60.6 प्रति.)


अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book