झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई - कपिल Jhansi Ki Rani Lakshmibai - Hindi book by - Kapil
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झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई

कपिल

प्रकाशक : प्रतिभा प्रतिष्ठान प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :24
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 3907
आईएसबीएन :81-88266-30-2

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रानी लक्ष्मीबाई का जीवन परिचय ...

Jhansi Ki Rani Laxmibai -A Hindi Book by Kapil

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

रानी लक्ष्मीबाई

बलिदानों की धरती भारत में ऐसे-ऐसे वीरों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने रक्त से देशप्रेम की अमिट गाथाएं लिखीं। यहाँ की ललनाएं भी इस कार्य में कभी किसी से पीछे नहीं रहीं, उन्हीं में से एक का नाम है-झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई। उन्होंने न केवल भारत की बल्कि विश्व की महिलाओं को गौरवान्वित किया। उनका जीवन स्वयं में वीरोचित गुणों से भरपूर, अमर देशभक्ति और बलिदान की एक अनुपम गाथा है।

लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर, 1835 को काशी में हुआ था। इनके पिता का नाम मोरोपंत तांबे और माता का नाम भागीरथीबाई था। पिता मोरोपंत तांबे अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय के भाई चिमाजी अप्पा के मुख्य सलाहकार थे। माता भागीरथीबाई सुशील, चतुर और रूपवती महिला थीं।

लक्ष्मीबाई का बचपन का नाम ‘मनु’ था। मोरोपंत और भागीरथीबाई बडे़ ही लाड़-प्यार से मनु का पालन- पोषण करने लगे। इस तरह धीरे-धीरे समय गुजरता गया इसी बीच मनु चार वर्ष की हुई तभी उनके ऊपर से माँ का साया उठ गया। मोरोपंत पत्नी की मृत्यु के शोक में डूब गये। यह खबर जब बिठूर में बाजीराव को मिली तो उन्होंने मोरोपंत को अपने पास बुलवा लिया।


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