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भाषा एवं साहित्य >> घाघ और भड्डरी की कहावतें घाघ और भड्डरी की कहावतेंदेवनारायण द्विवेदी
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घाघ और भड्डरी में दैवी प्रतिभा थी। उनकी जितनी कहावतें हैं, सभी प्रायः अक्षरशः सत्य उतरती हैं।
भोर समै डर डम्बरा, रात उजेरी होय।
दुपहरिया सूरज तपै, दुरभिक्ष तेऊ जोय।।
प्रातःकाल बादल घिरे, दोपहर को सूरज तपे और रात में आकाश स्वच्छ रहे तो
निश्चय दुर्भिक्ष जानो।
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