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नाटक-एकाँकी >> बाँस की फाँस बाँस की फाँसवृंदावनलाल वर्मा
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वर्माजी के इस सामाजिक नाटक में हमारे विद्यार्थियों में आचरण का जो असंयम और भोंडापन तथा साथ ही कभी-कभी उन्हीं विद्यार्थियों में त्याग की महत्ता दिखाई पड़ती है, उसका अच्छा सामंजस्य है। निश्चय ही यह उच्च कोटि की कृति है।
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