लोगों की राय

जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :390
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 1530
आईएसबीएन :9788128812453

Like this Hindi book 3 पाठकों को प्रिय

160 पाठक हैं

my experiment with truth का हिन्दी रूपान्तरण (अनुवादक - महाबीरप्रसाद पोद्दार)...

रवानगी


मि. केलनबैक हिन्दुस्तान जाने के निश्चय से हमारे साथ निकले थे। विलायत में हमसाथ ही रहते थे। पर लड़ाई के कारण जर्मनो पर कड़ी नजर रखी जाती थी, इससे केलनबैक के साथ आ सकने के विषय में हम सब को सन्देह था। उनके लिए पासपोर्टप्राप्त करने का मैंने बहुत किया। मि. रॉबर्टसे स्वयं उनके लिए पासपोर्ट प्राप्त करा देने के लिए तैयार थे। उन्होंने सारी हकीकत का तार वाइसरॉय केनाम भेजा, पर लार्ड हार्डिग का सीधा औऱ दो टूक उत्तर मिला, 'हमे खेद है। लेकिन इस समय ऐसा कोई खतरा उठाने के लिए हम तैयार नहीं है।' हम सब इसउत्तर के औचित्य को समझ गये। केलनबैक के वियोग का दुःख मुझे तो हुआ ही, पर मैंने देखा कि मुझसे अधिक दुःख उन्हे हुआ। वे हिन्दुस्तान आ सके होते, तोआज एक सुन्दर किसान और बुनकर का सादा जीवन बिताते होते। अब वे दक्षिण अफ्रीका में अपना पहले का जीवन बिता रहे है और गृह निर्माण कला को अपनाधंधा धडल्ले से चला रहे है।

हमने तीसरे दर्जे के टिकट लेने का प्रयत्न किया, पर पी. एंड ओ. जहाज में तीसरे दर्जे के टिकट नहीं मिलते।अतएव दूसरे दर्जे के लेने पड़े। दक्षिण अफ्रीका से साथ बाँध कर लाया हुआ कुछ फलाहार, जो जहाजो में मिल ही नहीं सकता था, साथ ले लिया। दूसरी चीजेतो जहाज में मिल सकती थी।

डॉ. मेंहता ने मेरे शरीर को मीड्ज प्लास्टर की पट्टी से बाँध दिया था और सलाह दी थी कि मैं यह पट्टी बँधीरहने दूँ। दो दिन तक तो मैंने उसे सहन किया, लेकिन बाद में सहन न कर सका। अतएव थोड़ी मेंहनत से पट्टी उतार डाली और नहाने-धोने की आजादी हासिल की।खाने में मुख्यतः सूखे और गीले मेंवे को ही स्थान दिया। मेरी तबीयत दिन-प्रतिदिन सुधरती गयी और स्वेज की खाड़ी में पहुँचते पहुँचते तो बहुतअच्छी हो गयी। शरीर दुर्बल था, फिर भी मेरा डर चला गया और मैं धीरे धीरे रोज थोडी कसरत बढ़ाता गया। मैंने माना कि यह शुभ परिवर्तन केवल शुद्धसमशीतोष्ण हवा के कारण ही हुआ था।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book