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जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :390
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 1530
आईएसबीएन :9788128812453

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my experiment with truth का हिन्दी रूपान्तरण (अनुवादक - महाबीरप्रसाद पोद्दार)...


मि. केलनबैक ने सिर हिलाया।

यह नहीं कहा जा सकता कि इस प्रयोग का परिणाम बुरा निकला। मैं नहीं मानता किउससे मेरे लड़को को कोई नुकसान हुआ। उल्टे, मैं यह देख सका कि उन्हें लाभ हुआ। उनमें बड़प्पन का कोई अंश रहा हो, तो वह पूरी तरह निकल गया। वे सबकेसाथ घुलना-मिलना सीखे। उनकी कसौटी हुई।

इस और ऐसे दूसरे अनुभवो पर से मेरा यह विचार बना है कि माता-पिता की उचित देखरेख हो, तो भले औरबुरे लड़को के साथ रहने और पढने से भलो की कोई हानि नहीं होती। ऐसा कोई नियम तो है ही नहीं कि अपने लड़को को तिजोरी में बन्द रखने से वे शुद्धरहते है और बाहर निकलने से भ्रष्ट हो जाते है। हाँ, यह सच है कि जहाँ अनेक प्रकार के बालक और बालिकाये एकसाथ रहती और पढती है, वहाँ माता-पिता की औरशिक्षको की कसौटी होती है, उन्हें सावधान रहना पड़ता है।

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