लोगों की राय

जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :390
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 1530
आईएसबीएन :9788128812453

Like this Hindi book 3 पाठकों को प्रिय

160 पाठक हैं

my experiment with truth का हिन्दी रूपान्तरण (अनुवादक - महाबीरप्रसाद पोद्दार)...

एशियाई विभाग की नवाबशाही


नये विभाग के अधिकारी समझ नहीं पाये कि मैं ट्रान्सवाल में दाखिल कैसे हो गया। उन्होंनेअपने पास आने-जानेवाले हिन्दुस्तानियों से पूछा, पर वे बेचारे क्या जानते थे। अधिकारियों ने अनुमान किया कि मैं अपनी पुरानी जान-पहचान के कारण बिनापरवाने के दाखिल हुआ होऊँगा और अगर ऐसा है तो मुझे गिरफ्तार किया जा सकता हैं।

किसी बड़ी लड़ाई के बाद हमेशा ही कुछ समय के लिए राज्यकर्ताओ की विशेष सत्ता दी जाती हैं। दक्षिण अफ्रीका में भी यही हुआ।वहाँ शान्ति रक्षा के हेतु एक कानून बनाया गया था। इस कानून की एक धारा यह थी कि यदि कोई बिना परवाने के ट्रान्सवाल में दाखिल हो, तो उसे गिरफ्तारकर लिया जाय और उसे कैद में रखा जाय। इस धारा के आधार पर मुझे पकड़ने के लिए सलाह-मशविरी चला। पर मुझ से परवाना माँगने की हिम्मत किसी की नहींहुई।

अधिकारियों ने डरबन तार तो भेजे ही थे। जब उन्हें यह सूचना मिली कि मैं परवाना लेकर दाखिल हुआ हूँ तो वे निराश हो गये। पर ऐसी निराशासे यह विभाग हिम्मत हारने वाला नहीं था। मैं ट्रान्सवाल पहुँच गया था, लेकिन मुझे मि. चेम्बरलेन के पास न पहुँचने देने में यह विभाग अवश्य हीसफल हो सकता था। इसलिए प्रतिनिधियों के नाम माँगे गये। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद का अनुभव तो जहाँ-तहाँ होता ही था, पर यहाँ हिन्दुस्तान की सीगन्दगी और चालबाज की बू आयी। दक्षिण अफ्रीका में शासन के साधारण विभाग जनता के लिए काम करते थे, इसलिए वहाँ के अधिकारियों में एक प्रकार कीसरलता और नम्रता थी। इसका लाभ थोड़े-बहुत अंश में काली-पीली चमड़ीवालो को भी अनायास मिल जाता था। अब जब इससे भिन्न एशियाई वातावरण ने प्रवेश किया,तो वहाँ के जैसी निरंकुशता, वैसे षड्यंत्र आदि बुराइयाँ भी आ घुसीं। दक्षिण अफ्रीका में एक प्रकार की लोकसत्ता थी, जब कि एशिया से तो निरीनवाबशाही ही आयी, क्योंकि वहाँ जनता की सत्ता नहीं थी, बल्कि जनता पर ही सत्ता चलायी जाती थी। दक्षिण अफ्रीका में गोरे घर बनाकर बस गये थे, इसलिएवे वहाँ की प्रजा माने गये। इस कारण अधिकारियों पर उनका अंकुश रहता था। इसमे एशिया से आये हुए निरंकुश अधिकारियों में सम्मिलित होकरहिन्दुस्तानियों की स्थिति सरोते के बीच सुपारी जैसी कर डाली।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book