लोगों की राय

जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :390
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 1530
आईएसबीएन :9788128812453

Like this Hindi book 3 पाठकों को प्रिय

160 पाठक हैं

my experiment with truth का हिन्दी रूपान्तरण (अनुवादक - महाबीरप्रसाद पोद्दार)...


मैंने दिन के दो भाग कर दिये थे। एक भाग मैं दक्षिण अफ्रीका के काम केसिलेसिले में कलकत्ते में रहनेवाले नेताओं से मिलने में बिताता था, और दूसरा भागकलकत्ते की धार्मिक संस्थाये और दूसरी सार्वजनिक संस्थाये देखने में बिताता था।

एक दिन बोअर-युद्ध में हिन्दुस्तानी शुश्रषा-दल मेंजो काम किया था, उस पर डॉ. मलिक के सभापतित्व में मैंने भाषण किया। 'इंलिश मैन' के साथ मेरी पहचान इस समय भी बहुत सहायक सिद्ध हुई। मि. सॉंडर्स उनदिनो बीमार थे, पर उनकी मदद तो सन् 1896 में जितनी मिली थी, उतनी ही इस समय भी मिली। यह भाषण गोखले को पसन्द आया था और जब डॉ. राय ने मेरे भाषणकी प्रशंसा की तो वे बहुत खुश हुए थे।

यों, गोखले की छाया में रहने से बंगाल में मेरा काम बहुत सरल हो गया था। बगाल के अग्रगण्य कुटुंबोकी जानकारी मुझे सहज ही मिल गयी और बंगाल के साथ मेरा निकट संबंध जुड़ गया। इस चिरस्मरणीय महीने के बहुत से संस्मरण मुझे छोड़ देने पड़ेगे। उसमहीने में मैं ब्रह्मदेश का भी एक चक्कर लगा आया था। वहाँ के फुंगियो से मिला था। उनका आलस्य देखकर मैं दुःखी हुआ था। मैंने स्वर्ण-पैगोड़ा केदर्शन किये। मंदिर में असंख्य छोटी-छोटी मोमबत्तियाँ जल रही थी। वे मुझे अच्छी नहीं लगी। मन्दिर के गर्भगृह में चूहों को दौड़ते देखकर मुझे स्वामीदयानन्द के अनुभव का स्मरण हो आया। ब्रह्मदेश की महिलाओ की स्वतंत्रता, उनका उत्साह और वहाँ के पुरुषों की सुस्ती देखकर मैंने महिलाओ के लिएअनुराग और पुरुषो के लिए दुःख अनुभव किया। उसी समय मैंने यह भी अनुभव किया कि जिस तरह बम्बई हिन्दुस्तान नहीं हैं, उसी तरह रंगून ब्रह्मदेश नहींहैं, और जिस प्रकार हम हिन्दुस्तान में अंग्रेज व्यापारियों के कमीशन एजेंट या दलाल बने हुए हैं, उसी प्रकार ब्रह्मदेश में हमने अंग्रेजो केसाथ मिलकर ब्रह्मदेशवासियो को कमीशन एजेंट बनाया है।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book