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जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :390
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 1530
आईएसबीएन :9788128812453

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my experiment with truth का हिन्दी रूपान्तरण (अनुवादक - महाबीरप्रसाद पोद्दार)...


इस पर सुपरिटेण्डेण्ट एलेक्जेण्डर नेकहा, 'तो आप लोग अपने में से जिसे नियुक्त कर दे उसे मैं अन्दर ले जाऊँ और वह तलाश करके देख ले। अगर आप गाँधी को ढूढ़ निकाले तो मैं उसे आपके हवालेकर दूँगा। न ढूढ़ सके तो आपको बिखर जाना होगा। मुझे विश्वास तो हैं ही कि आप पारसी रुस्तमजी का मकान हरगिज नहीं जलायेंगे और न गाँधी केस्त्री-बच्चों को कष्ट पहुँचायेंगे।'

भीड़ ने प्रतिनिधि नियुक्त किये। उन्होंने तलाशी के बाद उसे निराशाजनक समाचार सुनाये। सबसुपरिटेण्डेण्ट एलेक्जेण्डर की सूझ-बूझ और चतुराई की प्रसंशा करते हुए पर मन ही मन कुछ गुस्सा होते हुए, बिखर गये।

उस समय के उपनिवेश मंत्री स्व. मि. चेम्बरलेन ने तार द्वारा सूचित किया कि मुझ पर हमला करनेवालों पर मुकदमा चलाया जाय और मुझे न्याय दिलाया जाय। मि. एस्कम्ब ने मुझे अपने पास बुलाया। मुझे पहुँची हुई चोट के लिए खेद प्रकट करते हुए उन्होंनेकहा, 'आप यह तो मानेगे ही कि आपका बाल भी बाँका हो तो मुझे उससे कभी खुशी नहीं हो सकती। आपने मि. लाटन की सलाह मानकर तुरन्त उतर जाने का साहस किया।आपको ऐसा करने का हक था, पर आपने मेरे संदेश को मान लिया होता तो यह दुःखद घटना न घटती। अब अगर हमला करने वालों को पहचान सकें तो मैं उन्हेंगिरफ्तार करवाने और उनपर मुकदमा चलाने को तैयार हूँ। मि. चेम्बरलेन भी यही चाहते हैं।'

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