युगांतर के फूल - कुमार मिथिलेश प्रसाद सिंह Yugantar Ke Phool - Hindi book by - Kumar Mithilesh Prasad Singh
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युगांतर के फूल

कुमार मिथिलेश प्रसाद सिंह

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2014
पृष्ठ :168
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 14405
आईएसबीएन :9788126725618

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युगान्तर के फूल' में दस लम्बी कविताएँ हैं।

युगान्तर के फूल' में युग-युग का अन्तर जतलाने की तहजीब है। व्यक्तित्व की प्रधानता के कारण खास कालखंड को उस व्यक्तित्व का नाम देकर युग को सम्बोधित करने की परिपाटी है कि वह अमुक युग था या यह अमुक युग चल रहा है। 'युगान्तर के फूल' में दस लम्बी कविताएँ हैं। सभी कविताएँ अलग-अलग भावभूमि की हैं, जिसमें देखी-समझी-भोगी अनुभूतियों के अलावा वर्तमान विसंगतियों और जरूरतों का समावेश भी हैं। 'युगान्तर के फूल' ऐसे विषय से सम्बन्धित है, जो काव्य-रचना की परम्परा में सर्वस्वीकृत नहीं माने जा सकते। इसकी स्वीकार्यता के खतरे को जानते हुए भी मैंने जोखिम उठाया है। मैं साहित्य की समृद्धि के लिए ऐसे जोखिम को आवश्यक मानता हूँ। यदि पाठक ऐसे विषयों पर लिखी कविताओं को साहित्य की समृद्धि एवं दीन-दुखियों की सेवा के लिए अपरिहार्य मानें तो मैं उन्हें भरोसा दे सकता हूँ कि इस दिशा में अभिनवपन की खुराक उन्हें भविष्य में भी मिलेगी। यों भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने लेखकों को चुनौती दे रखी है कि अब नई पीढ़ी को अद्यतन जानकारी से सहज-सरल तरीकों से अवगत कराओ। ग्राह्य और विषयगत बनाने की जवाबदेही लेखक बिरादरियों की है। पुरातन परम्पराएँ बदलाव के साथ अपना विकास चाहती हैं।

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