टॉल्स्टॉय और साइकिल - केदारनाथ सिंह Tolstoy Aur Saikil - Hindi book by - Kedarnath Singh
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टॉल्स्टॉय और साइकिल

केदारनाथ सिंह

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :139
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 14339
आईएसबीएन :0

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ताल्सताय और साइकिल केदारनाथ सिंह की नई कविताओं का संग्रह है

ताल्सताय और साइकिल केदारनाथ सिंह की नई कविताओं का संग्रह है, जो सबसे पहले कविता को देशज- नागर-वैश्विक इतिहास और भूगोल-विमर्श के बीच एक पुल बनाता है। केदारनाथ सिंह का काव्य-समय एक न होकर अनेक है और सांस्कृतिक बहुलता को अर्थ देता है। पहले की, पर लम्बे समय से बनी पहचान को यह छंद और छंद के बाहर नया विस्तार देने वाला संग्रह है। एक कविता के शीर्षक के अनुसार ही कहें, यह एक ज़रूरी चिट्ठी का मसौदा है। पानी की प्रार्थना, त्रिनीदाद, पांडुलिपियाँ, घोंसलों का इतिहास, बुद्ध से, ईश्वर और प्याज़, बर्लिन की टूटी दीवार को देखकर, जेएनयू में हिंदी और शहरबदल जैसी कविताएँ अपनी अंतर्वस्तु में गहन और बनावट में अपूर्व हैं। लुखरी का आत्मव्यंग्य न दूसरों को बख़्शता है, न अपने को ! फंतासी और अयथार्थ भी आज की जटिल सच्चाई के ही सगोतिया हैं। केदारनाथ सिंह की हर कविता एक नया प्रस्थान है जो काव्यात्मक-अकाव्यात्मक, सहज-जटिल को एकसाथ साधने की विलक्षण कला का साक्ष्य है। जो कवि ताल्सताय और साइकिल जैसी कविता लिख सकता है, जो चींटियों की रुलाई सुन सकता है, जो इब्राहीम मियाँ ऊँटवाले को पहचान सकता है, उस कवि को गहरी समझ के साथ ही पढ़ा जा सकता है। यह कविता और मनुष्य को बचाने की ऐसी कोशिश है जो देह-देहांतर के रिश्तों को पहचानने में सक्षम है। ताल्सताय और साइकिल केदारनाथ सिंह की लम्बी काव्य-यात्रा का एक ऐसा पड़ाव है, जहाँ समकालीन अनुभव के कई ऐसे धरातल उभरते दिखाई पड़ते हैं, जो उसके नए अनुषंगों को खोलते हैं और कई बार उसकी सुपरिचित परिधि को अतिक्रान्त भी करते हैं।


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