गुजरात के बाद - जगन्नाथ प्रसाद दास Gujrat Ke Baad - Hindi book by - Jagannath Prasad Das
लोगों की राय

कविता संग्रह >> गुजरात के बाद

गुजरात के बाद

जगन्नाथ प्रसाद दास

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2014
पृष्ठ :79
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 13875
आईएसबीएन :9788126726165

Like this Hindi book 0

जगन्नाथ प्रसाद दास की इन मूलत: ओडिय़ा कविताओं का अनुवाद करते समय राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने कविता की बहुअर्थी प्रकृति का ध्यान रखा है।

कविता संवेदना और विचार के सहमेल से यथार्थ को उसकी समग्र सम्भावना के साथ व्यक्त करती है। जगन्नाथ प्रसाद दास की कविताओं को पढ़ते हुए निरन्तर अनुभव होता है कि कविता समकालीन यथार्थ के साथ परम्परा के संघर्ष को भी प्रकट करती है। 'गुजरात के बाद' की कविताएँ गहन आत्मानुभूति से उपजी हैं। परिवेश का प्रभाव तो है ही, कवि ने स्मृतियों को टटोलते हुए अर्थ की पूँजी सहेजी है। इन कविताओं में उम्मीद का उजाला है। यह उजाला विषाद के क्षणों में भरोसा दिलाता है। कवि ने हमारे समय के संकटों को कई जगह संकेतित किया है। 'अरण्य' की पंक्तियाँ हैं : 'वनस्पति की सघनता को भेदकर लकड़हारे की पदचाप सुनाई पड़ती है सहज कलरव का अविरल छन्द हठात् थम जाता है इतिहास की अन्तिम कथा सा।' जगन्नाथ प्रसाद दास की इन मूलत: ओडिय़ा कविताओं का अनुवाद करते समय राजेन्द्र प्रसाद मिश्र ने कविता की बहुअर्थी प्रकृति का ध्यान रखा है।


अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book