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हिन्दू बनाम हिंदू

राममनोहर लोहिया

प्रकाशक : लोकभारती प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :114
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 13144
आईएसबीएन :9788180314049

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प्रस्तुत पुस्तक में जातिवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, गुलामी, आजादी और उत्थान, जातिप्रथा समस्या की जड़, छोटी जातियां और भाषा आदि महत्त्पूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है

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हिंदुस्तान बहुत बड़ा है और पुराना देश है। मनुष्य की इच्छा के अलावा कोई शक्ति इसमें एकता नहीं ला सकती। कट्टरपंथी हिन्दुत्व अपने स्वाभाव के करण ही ऐसी इच्छा नहीं पैदा कर सकता, लेकिन उदार हिदुत्व कर सकता है, जैसा पहले कई बार कर चूका है। हिन्दू धर्म संकुचित दृष्टि से राजनीतिक धर्म, सिद्धांतों और संगठन का धर्म नहीं है। लेकिन राजनीतिक देश के इतिहास में एकता लाने की बड़ी कोशिशों को इससे प्रेरणा मिली है और उनका यह प्रमुख माध्यम रहा है। हिन्दू धर्म में उदारता और कट्टरता के महान युद्ध को देश की एकता और बिखराव की शक्तियों का संघर्ष भी कहा जा सकता है। इदर हिन्दुत्व पूरी तरह समस्या का हल नहीं कर सका। विविधता में एकता के सिद्धांत के पीछे सदन और बिखराव के बीज छिपे हैं। कट्टरपंथी तत्वों के अलावा, जो हमेशा ऊपर से उदार हिन्दू विचारों में घुस आते हैं और हमेशा दिमागी सफाई हिसिल करने में रूकावट डालते हैं, विविधता में एकता का सिद्धांत ऐसे दिमाग को जन्म देता है जो समृद्ध और निष्क्रिय दोनों ही है। प्रस्तुत पुस्तक में जातिवाद की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, गुलामी, आजादी और उत्थान, जातिप्रथा समस्या की जड़, छोटी जातियां और भाषा आदि महत्त्पूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है।

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