कथा लोकनाथ की - ऋता शुक्ल Katha Loknath Ki - Hindi book by - Rita Shukla
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उपन्यास >> कथा लोकनाथ की

कथा लोकनाथ की

ऋता शुक्ल

प्रकाशक : प्रभात प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :192
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 12237
आईएसबीएन :9788177213645

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यह कथा लोकनाथ की है। एक नहीं, अनेक लोकनाथ !

वे सब, जो स्नेह-वात्सल्य की गंगोत्तरी हैं, ज्ञान-स्वाभिमान के अनहद शिखर हैं। मन, प्राणों में असीम उद्विग्नता लिये, जीवन की क्षरण वेला में भी अदम्य जिजीविषा रखनेवाले।

अकल्पनीय यंत्रणा झेलते शरीर-मनवाले लोकनाथ की यह कथा हर उस कलमव्रती की पीड़ा का साक्षात्कार है, जो अपने सपनों के संसार को सत्य की आकृति देने के लिए आकुल-व्याकुल रहता है। ऐसी पारसमणियों को भी अंतर्दाह झेलना होता है।

ग्रंथों के संसार में निवास करनेवाली आत्मा को लौकिकता का दंश मिलना ही है। एक ओर अकूत भौतिक समृद्धि और दूसरी ओर ज्ञान-संपदा को ही सर्वस्व मानने की मनस्विता ! विषकीट से संबंधों की, ज्ञान गुमानियों की तितीक्षा, भारतीय संस्कृति के लोकराग से जुड़ी भोगवादी मनोवृत्ति से कोसों दूर कल्मष से युद्ध करती ये संज्ञाएँ।

अपनी-अपनी अनुभूतियों की सलीब पर चढ़े, अग्निस्नान करते, विपरीतताओं से सतत जूझते लोकनाथों की व्यथा-कथा आपके समक्ष है इस अत्यंत पठनीय मर्मस्पर्शी उपन्यास ‘कथा लोकनाथ की’।


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