लोगों की राय

गीता प्रेस, गोरखपुर >> 17 श्रीमद्भगवद्गीता

17 श्रीमद्भगवद्गीता

जयदयाल गोयन्दका

प्रकाशक : गीताप्रेस गोरखपुर प्रकाशित वर्ष : 2014
पृष्ठ :428
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 1188
आईएसबीएन :81-293-0242-x

Like this Hindi book 8 पाठकों को प्रिय

83 पाठक हैं

प्रस्तुत है श्रीमद्भगवद्गीता पदच्छेद अन्वय...

प्रथम पृष्ठ

17 Srimadbhagwadgita - A Hindi Book by Jaidayal Goyandaka

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश


श्रीपरमात्मने नमः

शास्त्रों का अवलोकन और महापुरुषों के वचनों का श्रवण करके मैं इस निर्णय पर पहुँचा कि संसार में श्रीमद्भगवद्गीता के समान कल्याण के लिये कोई भी उपयोगी ग्रन्थ नहीं है। गीता में ज्ञानयोग, ध्यानयोग, कर्मयोग, भक्तियोग आदि जितने भी साधन बतलाये गये हैं, उनमें से कोई भी साधन अपनी श्रद्धा, रुचि और योग्यता के अनुसार करने से मनुष्य का शीघ्र कल्याण हो सकता है।

अतएव उपर्युक्त साधनों का तथा परमात्मा का तत्त्व रहस्य जानने के लिये महापुरुषों का और उनके अभाव में उच्चकोटि के साधकों का श्रद्धा-प्रेमपूर्वक संग करने की विशेष चेष्टा रखते हुए गीता का अर्थ और भावसहित मनन करने तथा उसके अनुसार अपना जीवन बनाने के लिये प्राण पर्यन्त प्रयन्त करना चाहिए।

निवेदक
जयदयाल गोयन्दका

प्रथम पृष्ठ

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book