Saiyad Athar Abbas Rizvi/सैयद अतहर अब्बास रिजवी
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लेखक:

सैयद अतहर अब्बास रिजवी

विख्यात इतिहासविद्, सम्पादक, अनुवादक।

जन्म : 1921

कृतियाँ : मुस्लिम रिवाइवलिस्ट मूवमेंट्स इन नार्दर्न इंडिया इन द सिक्सटींथ एंड सेवेंटींथ सेंचुरीज़’ (1965), ‘इंटेलेक्चुअल हिस्ट्री ऑफ अकबर्स रेन’ (1971), ‘ए हिस्ट्री ऑफ सूफ़ीज्म इन इंडिया’ (दो खंड, 1978 1988), ‘शाह वली अल्लाह एंड हिज टाइम्स’ (1980), ‘शाह अब्दुल अज़ीज़’ (1982), ‘सोशियो-इंटेलेक्चुअल हिस्ट्री ऑफ द इश्ना अश्री शियाज इन इंडिया’ (दो खंड, 1986)

अनूदित कृतियाँ : मुक़द्दिमा’ (1961), ‘फतेहपुर सीकरी’ (वी.जे.ए. फ्लीन के साथ, 1975), ‘ईरान : रॉयल्टी, रिलीजन एंड रिवोल्यूशन’ (1980), ‘द वंडर दैट वाज इंडिया’ (दो खंड, 1987)

विभिन्न पत्रिकाओं व जर्नल्स में आलेख।

निधन : 3 सितम्बर, 1994

आदि तुर्क कालीन भारत (1206-1290)

सैयद अतहर अब्बास रिजवी

मूल्य: Rs. 450

आदि तुर्क कालीन भारत (1206-1290)

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उत्तर तैमूरकालीन भारत: खंड -1

सैयद अतहर अब्बास रिजवी

मूल्य: Rs. 500

इस पुस्तक में 1399 से 1526 ई. तक के देहली के सुल्तानों के इतिहास से सम्बन्धित समस्त प्रमुख समकालीन एवं बाद के फ़ारसी के ऐतिहासिक ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया जा रहा है।   आगे...

खलजी कालीन भारत

सैयद अतहर अब्बास रिजवी

मूल्य: Rs. 600

विद्वान अनुवादक ने इन ग्रन्थों का आलोचनात्मक विवेचन किया है जिसके चलते यह पुस्तक इतिहासज्ञों के साथ- साथ सामान्य पाठकों के लिए भी सुग्राह्य हो गई है।   आगे...

तुगलक कालीन भारत: खंड -1

सैयद अतहर अब्बास रिजवी

मूल्य: Rs. 950

इतिहास के छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और इतिहासकारों के साथ-साथ इतिहास में रुचि रखनेवाले आम पाठकों के लिए भी ग्रंथ संग्रहणीय है।   आगे...

तुगलक कालीन भारत: खंड -2

सैयद अतहर अब्बास रिजवी

मूल्य: Rs. 950

यह ग्रंथ उस युग की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराता है।   आगे...

मुगल कालीन भारत (बाबर)

सैयद अतहर अब्बास रिजवी

मूल्य: Rs. 3000

मुगल कालीन भारत (बाबर)

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मुगल कालीन भारत: हुमायूँ: खंड -1

सैयद अतहर अब्बास रिजवी

मूल्य: Rs. 3000

हुमायूँ से सम्बन्धित फारसी स्रोतों का अनुवाद ‘मुग़लकालीन भारत’ भाग-1 एवं 2 में प्रकाशित किया गया है।

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मुगल कालीन भारत: हुमायूँ: खंड -2

सैयद अतहर अब्बास रिजवी

मूल्य: Rs. 2000

अन्य ग्रन्थों की तरह यह ग्रन्थ भी हुमायूँकालीन इतिहास के अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी है

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