लोगो की राय

गणेश चतुर्थी

वैदिक काल में पूजा, अर्चना अथवा यज्ञ करते समय एक समान ध्येय से एकत्र हुए गण अथवा लोग गणेशजी को अपना गणपति अथवा विनायक मानकर उनका ध्यान करते थे। इसी पृथा का एक रूप आज भी जीवन में देखने को मिलता है, जब हम गणेशजी का ध्यान करके अपना कोई भी कार्य आरंभ करते हैं। स्वाभाविक है कि साधारण कार्यों में तो हमारा ध्यान नहीं जाता है, परंतु किसी विशेष कार्य में अथवा किसी कठिन कार्य को आरंभ करते समय हम उस कार्य की सफलता के प्रति आशंकित रहते हैं। गणेश जी को अपने गणदेवता के रूप में ध्यान कर हम उनसे आह्वाहन करते हैं कि वे हमारे कार्य को निर्विध्न पूरा करने में सहायता करें।

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