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स्वतंत्रता दिवस

सन् 1947 में स्वतंत्र हुआ हमारा देश पिछले 70 वर्षों में सार्वभौमिक प्रगति करता हुआ आज विश्व की पाँचवीं अर्थव्यवस्था बन गया है। स्वतंत्रता के समय विश्व के कई नेताओं का मत था कि विश्व युद्ध के बाद बनी हुई परिस्थितियों में मिली हुई स्वतंत्रता की रक्षा हम नहीं कर पायेंगे, बल्कि संभवतः समृद्ध देशों से परतंत्रता की भीख माँगने की अवस्था में आ जायेंगे। इतने समय में हमने बहुत प्रगति की है, जनसंख्या में 33 करोड़ लोगों से अब 133 करोड़ हो गये हैं, फिर भी ओलंपिक के खेलों की पदक तालिका में हमारा नाम बहुत कठिनाई से आ पाता है। लेकिन वहीं दूसरी ओर विश्व में आज संभवतः बहुत ही कम आईटी विभाग होंगे जहाँ कि एक भी भारतीय न हो! विविध संप्रदायों, आस्थाओं और व्यक्तित्वों से बना हमारा देश ही दुनिया का एक विरला स्थान है, जहाँ संन्यासी होते भी हैं और संन्यास लेकर राजनीति भी करते हैं। इस सब के बाद भी हम सतत् आगे बढ़ रहे हैं और बढ़ते भी रहेंगे, क्योंकि हम झुझारू हैं, लेकिन उससे भी अधिक हम सर्वगुण संपन्न हैं, क्योंकि हम सर्वस्व जगत् को प्रकाश देने वाले परमात्मा और तर्कहीन बातों पर आपस में विवाद करने वाले लोगों, दोनों को साथ लेकर चल रहे हैं।
आज की पीढ़ी के लिए यह अनुभव करना बहुत कठिन है कि यदि विचार और कृत्य की स्वतंत्रता न हो तो कैसी घुटन होती है? संभवतः यदि हम समझ सकें कि जहाँ एक ही घर के दो लोगों के बीच जब विचारों का सामञ्जस्य नहीं बन पाता है और वे एक दूसरे की स्वतंत्रता में बाधक बन जाते हैं तो 133 करोड़ लोगों के बीच यह कार्य कितना कठिन होगा! स्वतंत्रता हमारी नैसर्गिक प्रकृति है और हमें उसका यथोचित सम्मान करना चाहिए, बल्कि इस स्वतंत्रता को हमें पूर्वजों द्वारा प्रदत्त बहुमूल्य धरोहर समझ कर संभालना चाहिए। हमें स्वतंत्र भारत देश का नागरिक होने पर गर्व तो है ही, परंतु साथ ही साथ हम इसके लिए कृतज्ञ भी हैं।

कुछ चुनी हुई पुस्तकें

चाणक्य नीति

अश्विनी पाराशर

मूल्य: $ 5.95

हरिवंश गाथा

अमृता भारती

मूल्य: $ 14.95

 

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