स्कोलेरिस की छाँव में - पुरुषोत्तम अग्रवाल Scoleris Ki Chhaon Mein - Hindi book by - Purushottam Agrawal
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स्कोलेरिस की छाँव में

पुरुषोत्तम अग्रवाल

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2015
आईएसबीएन : 9788126728671 मुखपृष्ठ : सजिल्द
पृष्ठ :132 पुस्तक क्रमांक : 9348

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प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

वापसियों के थोक के थोक वापस चले आ रहे हैं ! ऐसे में आपकी तो एकदम बेसिक-बल्कि रैडिकल वापसी थी, बॉस ! एकदम टू द रूट्स-अकबर इलाहाबादी की शिकायत, ज्ञानी जैलसिंह की मलामत और क्रिएशनिस्टो की हजामत के बावजूद-डार्विन को सही मानें तो एकदम टंच वापसी थी, बॉस, एकदम टंच ! ऊपर से मजा यह कि थिंक ग्लोबल-एक्ट लोकल; कॉरपोरेट प्लस एन.जी.ओ. प्रमाणित इडीयम के सर्वथा अनुकूल भी ! बाकी वापसियाँ डिफरेंट और स्पेसिफिक की वापसियाँ हैं आइडेंटीटी की वापसियाँ हैं-आप तो पूज्यवर हम सबकी उनिवेर्सेलीटी और उसकी रूट्स-जड़ों की वापसी थे !

लेकिन साथ ही क्या कहने इस वापसी के अनमिस्टेकेबल लोकल टच के, हेल्मेट विभूषित आपका मुखमंडल बंधू भव्य बल्कि इराटिक तो लगता ही था - खास दिल्ली की खास पहचान भी तो बताता था ! आपने याद दिलाया हम दिल्लीवालों को हमारा भविष्य कि बिना हेल्मेट पहने अब अपने घर में क्या बिस्तर में घुसना भी सेफ नहीं रहनेवाला ! हालाँकि हेल्मेट भी किसी का क्या उखाड़ लेगा, लाला ? यह भी तो आपने ही अपने कपोलविदारक ह्रदयद्रावक तीक्ष्ण नख-समूह से सिद्ध कर डाला ! इसीलिए अपन कहते भए कि आप ग्लोबल की भी वापसी थे, लोकल की भी ! साइलेंट की वापसी भी, वोकल की भी !

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