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पीड़ा, नींद और एक लड़की

प्रेरणा सारवान

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2013
आईएसबीएन : 9788126724192 पृष्ठ :124
मुखपृष्ठ : सजिल्द पुस्तक क्रमांक : 8175

पीड़ा, नींद और एक लड़की

Pida,Neend Aur Ek Ladki by Prerna Sarwan

डायरी से :

दुख की गर्भपात नहीं होता है। दुख सतमासे भी नहीं होते हैं। दुख तो सम्पूर्ण रूप से जन्मते हैं जीवन की कोख से, इस विचार मात्र से मेरे भीतर दुखों की ज्वालामुखी उमड़ पड़ती है। उसी बहते हुए लावे में हैं हजारों दुखों के भ्रूण, जो एक क्षण में पूर्ण रूप से जन्म लेते हैं। जो मेरे पतन के कारण हैं या उन्नति के, मैं नहीं जानती। मैंने स्वयं से बाहर निकलकर कभी कुछ देखने का साहस या प्रयास नहीं किया। मैं भीतर ही भीतर जीवन की खाई को गहरा करने में लगी रहती हूँ। मुझे याद है, मुझे चाँद ने कभी नहीं छुआ लेकिन बन्द कमरों में आकर सूरज की आग मेरी कोमल देह को झुलसाती रही, पीड़ा देती रही।
11 जुलाई 1999

मेरी प्रत्येक कविता जीवन की प्रत्येक साँस का ऋण चुकाती है। मेरे जाने पर जीवन मुझ पर एहसान या दया की दुहाई न दे। मैं नहीं कहूँगी अपनी व्यथा, पर मेरी कविता जीवन के मुझ पर किए हुए अन्याय की कथा कहेगी। मृत्यु के बाद भी मेरी कविता खामोश नहीं होगी। मेरी कविता की सत्यता से यह जीवन मृत्यु के बाद भी नहीं बच पाएगा।
25 जनवरी, 1999

कितना बचाया पर आज आखिरकार गिन्नी चिड़िया के एक बच्चे को खा गई। हम क्या कर सकते हैं! ईश्वर ने जीवों की यही नियति निर्धारित की है। उसकी लीला वो ही जाने, चिड़िया जैसी कितनी इच्छाएँ मेरी रोज ही मरती हैं और आँसुओं में बहा दी जाती हैं।
20 मई, 2011


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