आधुनिक हिन्दी उपन्यास-2 - भीष्म साहनी Adhunik Hindi Upanyas-2 - Hindi book by - Bhishm Sahni
लोगों की राय

भाषा एवं साहित्य >> आधुनिक हिन्दी उपन्यास-2

आधुनिक हिन्दी उपन्यास-2

भीष्म साहनी

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2010
आईएसबीएन : 9788126718641 मुखपृष्ठ : सजिल्द
पृष्ठ :432 पुस्तक क्रमांक : 7980

Like this Hindi book 4 पाठकों को प्रिय

287 पाठक हैं

‘‘आधुनिक हिन्दी उपन्यास’ के इस दूसरे खंड के सम्पादक डॉ. नामवर सिंह हैं और इसमें अस्सी के दशक से 2003 तक के तीस उपन्यासों पर चर्चा शामिल है...

Adhunik Hindi Upanyas-2 - A Hindi Book - by Namvar Singh

आठवें दशक की समाप्ति के साथ हिन्दी उपन्यास को लेकर जिस नई गहमागहमी का दौर शुरू हुआ था, वह आज परिपक्वता प्राप्त कर चुका है। ‘नौकर की कमीज’ से लेकर ‘आखिरी कलाम’ तक विस्तृत हिन्दी उपन्यास का लगभग तीन दशकों का यह सफर भारतीय समाज के साथ उपन्यास के जनतान्त्रिकरण का भी दौर रहा है।

मध्यवर्गीय उभार, साम्प्रदायिकता, उपभोक्तावादी संस्कृति व हाशिए के लोगों की दास्तान समेटे हिन्दी उपन्यास ने जहाँ अपने सरोकारों का विस्तार किया है, वहीं कथ्य व रूप की एकरसता को भी तोड़ा है। कहा जा सकता है कि इस दौर में उपन्यास महज साहित्यिक संरचना न रहकर एक सामाजिक संरचना के रूप में भी अधिक पुष्ट और समृद्ध हुआ है।

लेकिन यही वह दौर भी है जब हिन्दी उपन्यासों में दो दृष्टियों का टकराव भी सामने आया। एक दृष्टि भारतीय समाज के संश्लिष्ट यथार्थ से मुठभेड़ करती हुई बदलते सामाजिक परिदृश्य की साक्षी थी तो दूसरी ‘विश्व नागरिकता’ की ललक में भाषायी खिलन्दड़ेपन का नट-सन्तुलन करते हुए ऐसी कलात्मक चकाचौंध को जन्म देती हुई जो यथार्थ को दृश्य-ओझल कर देती थी।

विश्वकथा साहित्य की तर्ज पर नारी चेतना के सशक्त तेवरों की अनुगूँज भी इधर के हिन्दी उपन्यासों में अत्यन्त प्रभावी ढंग से प्रकट हुई। नारी-देह का जुलूस निकालती पुरुषवादी रतिक दृष्टि के समानान्तर स्त्री लेखिकाओं का नारी-विमर्श नारी जीवन की गोपन सच्चाइयों व उन हादर्सों को बेपर्दा करता है, जो अपनी समस्त विकृति, कुत्सा व अविश्वसनीयता के बावजूद भारतीय समाज का नग्न व क्रूर यथार्थ है।

‘‘आधुनिक हिन्दी उपन्यास’ के इस दूसरे खंड के सम्पादक डॉ. नामवर सिंह हैं और इसमें अस्सी के दशक से 2003 तक के तीस उपन्यासों पर चर्चा शामिल है–प्रत्येक उपन्यास पर उसके लेखक के संस्मरणात्मक आलेख और किसी समीक्षक द्वारा की गई एक सारगर्भित समीक्षा के साथ।

अन्य पुस्तकें

To give your reviews on this book, Please Login