पतंजलि और आयुर्वेदिक योग - विनोद वर्मा Patanjali aur Ayurvedic Yog - Hindi book by - Vinod Verma
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पतंजलि और आयुर्वेदिक योग

विनोद वर्मा

प्रकाशक : राधाकृष्ण प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2008
आईएसबीएन : 978-81-8361-191 मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पृष्ठ :260 पुस्तक क्रमांक : 6813

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योग सूत्रों का दैनिक जीवन में उपयोग, आयुर्वेद के प्रयोग से निरोगी रहें और योग से ऊर्जा पाने के उपाय...

Krishna Chuda Ka Vriksh _ A hindi book by Ashapurna Devi

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश


आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांतों के अनुसार वात, पित्त और कफ में से किसी एक के असन्तुलन से मानसिक अवस्था में तो परिवर्तन आता ही है, उससे शरीर पर कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं। पतंजलि योग में वर्णित अष्टांग योग के प्रथम तीन अंगों - यम, नियम और आसन से त्रिदोष सन्तुलन में बड़ी सहायता मिलती है।
योग और आयुर्वेद दोनों ही मूल रूप से शरीर से सम्बन्धित हैं। इनके आधारभूत सिद्धांत सांख्य पर आधारित हैं। आयुर्वेदिक योग पतंजलि के अष्टांग योग से ही ग्रहण किया गया है। इसका आधारभूत उद्देश्य है - अच्छा स्वास्थ्य, शारीरिक-मानसिक संतुलन और जीवन का सम्पूर्ण आनन्द।
डॉ. विनोद वर्मा की इस पुस्तक का उद्देश्य योग और आयुर्वेद दोनों के माध्यम से शरीर को स्वस्थ रखना है। दूसरा उद्देश्य प्राचीन ज्ञान सागर से ऐसी नई एवं सरल विधियों का विकास करना है जिनसे मानव स्वास्थ्य, शान्ति और सौमनस्य प्राप्त कर सके। इस पुस्तक को पाँच खंडों में विभाजित किया गया है। पहले खंड में भारतीय परम्परा : योग और आयुर्वेद पर प्रकाश डाला गया है। दूसरे खंड में पतंजलि के योग सूत्रों की व्याख्या की गई है और तीसरे खंड में आयुर्वेद के मूलभूत सिद्धांत तथा चौथे खंड में योग और आयुर्वेद का एकीकरण एवं पाँचवें खंड में आयुर्वेद योग पर विस्तृत चर्चा की गई है।

लेखक के बारे में

डॉ. विनोद वर्मा का जन्म ऐसे परिवार में हुआ जहाँ हर रोज के क्रियाकलाप में ‘योग’ और ‘आयुर्वेद’ की बड़ी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। इन्होंने पिता और दादी माँ से आयुर्वेद और योग की प्रारम्भिक शिक्षा ग्रहण की। पंजाब विश्वविद्यालय से प्रजनन जीव-विज्ञान में और पेरिस से तंत्रिका जीव-विज्ञान में पी-एच. डी.। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ, अमेरिका में और फिर मैक्स प्लंक इंस्टिट्यूट जर्मनी में शोध-कार्य किया।
शोध के दौरान डॉ. वर्मा ने अनुभव किया कि नीरोग अवधान सम्बन्धी नई अवधारणा विखंडित है, इसके बावजूद हम स्वास्थ्य-सम्पोषण को त्यागकर सिर्फ रोगों के इलाज पर ही अपने समस्त साधन और प्रयास लगाते जा रहे हैं। उन्होंने प्राचीन परम्परा की ओर लौटने का निश्चय किया। अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने सन् 1987 में द न्यू वे हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (Now) की स्थापना की। इसका एक केन्द्र दिल्ली के निकट नोएडा में और दूसरा केन्द्र हिमालय की गोद में है, जहाँ विद्यार्थियों को प्राचीन भारतीय परम्परा पर आधारित आयुर्वेद की शिक्षा दी जाती है।
डॉ. वर्मा पिछले कई वर्षों से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के आचार्य प्रियव्रत शर्मा के साथ प्राचीन गुरु-शिष्य परम्परा के अनुसार आयुर्वेदिक ग्रन्थों का अध्ययन कर रही हैं। हर वर्ष कुछ महीने वे विदेश में बिताती हैं, जहाँ आयुर्वेद और योग द्वारा स्वास्थ्य तथा दीर्घायु जैसे विषयों पर उनके भाषण तथा कार्य-शिविर अत्यन्त लोकप्रिय हैं।

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