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पंचतंत्र की कहानियाँ

युक्ति बैनर्जी

1.5

प्रकाशक : बी.पी.आई. इण्डिया प्रा. लि. प्रकाशित वर्ष : 2007
आईएसबीएन : 978-81-7693-537 पृष्ठ :16
मुखपृष्ठ : पेपरबैक पुस्तक क्रमांक : 6320
 

पंचतंत्र की कहानियाँ बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानियाँ हैं। प्रचलित लोककथाओं के द्वारा प्रसिद्ध गुरु विष्णु शर्मा ने तीन छोटे राजकुमारों को शिक्षा दी।

Panchtantra Ki Kahaniyan

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

अनुक्रम

1. ब्राह्मण का सपना
2. चोर का बलिदान
3. हाथी और चूहे

पंचतंत्र की कहानियाँ


पंचतंत्र की कहानियाँ बच्चों के लिए शिक्षाप्रद कहानियाँ हैं। प्रचलित लोक कथाओं के द्वारा प्रसिद्ध गुरु विष्णु शर्मा ने तीन छोटे राजकुमारों को शिक्षा दी। ‘पंच’ का अर्थ है पाँच और ‘तन्त्र’ का अर्थ है प्रयोग। विष्णु शर्मा ने उनके व्यवहार को इन सरल कहानियों के द्वारा सुधारा। आज भी ये कहानियाँ बच्चों की मन पसंद कहानियाँ हैं।

ब्राह्मण का सपना


बहुत समय पहले की बात है। एक ब्राह्मण था जो भिक्षा माँगकर अपना गुजारा करता था। एक दिन उसे एक पात्र भर कर आटा भिक्षा में मिला। वह खुशी-खुशी घर आया और अपने बिस्तर के पास ही दीवार पर भिक्षा पात्र लटका दिया।
ब्राह्मण उस भिक्षा पात्र के पास लगे बिस्तर पर सो गया और सपने देखने लगा। उसने देखा कि देश में अकाल पड़ा है और उसने भिक्षा पात्र में रखा आटा बहुत अधिक दाम लेकर बेच दिया है। फिर वह सोचने लगा कि उस पैसे से उसने एक जोड़ी बकरियाँ खरीदीं और उन बकरियों को खूब अच्छी तरह से खिला-पिलाकर मोटा और तंदरुस्त कर दिया है। फिर उसने सपने में देखा कि उसने अपनी बकरियाँ काफी मंहगी बेच दी हैं और सोच रहा है, ‘‘अब तो मैं दो गाएं खरीदूँगा और वे मुझे बहुत सारा दूध देंगी। उस दूध से मैं मक्खन, मलाई निकालूँगा और मीठी-मीठी रसवाली मिठाइयाँ बनाऊँगा।’’
फिर सपना देखने लगा कि बाजार में उसकी एक बड़ी-सी दुकान हो जाएगी।

ब्राह्मण सपने देखता ही रहा। उसने देखा वह कीमती पत्थर बेचनेवाला एक अमीर व्यापारी बन गया है और सपने में ही वह सोचने लगा ‘‘अब तो मैं एक बड़ा-सा मकान बनाऊँगा। जिसके चारों ओर कमल के फूलों वाला तालाब होगा। कोई भी राजकुमारी मुझसे बे-झिझक विवाह करने को तैयार हो जाएगी और फिर हमारे दो सुन्दर-सुन्दर बच्चे होंगे।’’
पर बच्चे बहुत शैतान होंगे, इसलिए वे मुझे ज़रूर परेशान करेंगे।’’ उसने मन ही मन अपने से कहा। ‘‘मैं एक छड़ी लेकर उनकी पिटाई करूँगा।’’ सोते-सोते ही उसने एक छड़ी उठा ली और उसे हवा में घुमाने लगा। उसकी छड़ी आटे से भरे भिक्षा पात्र पर लगी और वह फूटकर नीचे गिर गया। वह सिर से पैर तक आटे से नहा गया।

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