606 रानी दुर्गावती - अनन्त पई 606 Rani Durgavati - Hindi book by - Anant Pai
लोगों की राय

अमर चित्र कथा हिन्दी >> 606 रानी दुर्गावती

606 रानी दुर्गावती

अनन्त पई

प्रकाशक : इंडिया बुक हाउस प्रकाशित वर्ष : 2006
आईएसबीएन : 81-7508-473-1 मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पृष्ठ :31 पुस्तक क्रमांक : 4783

Like this Hindi book 6 पाठकों को प्रिय

40 पाठक हैं

अमर चित्र-कथा के हमारे महापुरुषों के जीवन से सम्बन्धित कहानियों का वर्णन....

Rani Durgavati A Hindi Book by Anant Pai

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

घने जंगलों का क्षेत्र, गोंडवाना अब मध्यप्रदेश का अंग है। पर एक जमाने में यह देश से अलग-थलग था और बाकी देश पर जो कुछ बीता उससे यह बहुत कुछ अछूता रहा। तथापि उत्तर के सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव से यह नहीं बच सका। अनेक ऋषि-मुनियों ने यहाँ अपने आश्रम बनाये, क्योंकि यहाँ एकान्त भजन-पूजन के लिए बहुत उपयुक्त था। कभी यहाँ रानी दुर्गावती शासन करती थीं।

गोंडों के इस प्रदेश पर अनेक राजपूत सरदारों की वक्र दृष्टि पड़ी और उन्होंने इस पर अपना अधिकार जमा ही लिया। कुछ समय के लिए गोंडों ने उनकी सत्ता स्वीकार भी कर ली, परन्तु शीघ्र ही उनकी स्वाधीनता की भावना ने जोर मारा और धीरे-धीरे गोंड़ों ने अपने चार स्वाधीन राज्य वहाँ स्थापित कर लिए। उनमें एक गढ़-मंढ़ल का था और उसकी स्थापना की थी जदुराय ने। यह लगभग 600 वर्ष पुरानी बात है।

रानी दुर्गावती जदुराय के वंशज, दलपत शाह की विधवा थीं। मुगल सम्राट अकबर की राज्यलिप्सा का रानी ने जिस वीरता से सामना किया, उससे उनका नाम इतिहास में अमर हो गया। 500 सैनिकों की छोटी-सी सेना लेकर उन्होंने मुगल सेना में लोहा लिया। पीढ़ी दर पीढ़ी लोग इस शौर्य-गाथा को गर्व के साथ दोहराते आ रहे है।


अन्य पुस्तकें

To give your reviews on this book, Please Login