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उपन्यास >> निर्मला

निर्मला

प्रेमचंद

5.95

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2010
आईएसबीएन : 9788128400087 पृष्ठ :158
आवरण : पेपरबैक पुस्तक क्रमांक : 3147
 

अद्भुत कथाशिल्पी प्रेमचंद की कृति ‘निर्मला’ दहेज प्रथा की पृष्ठभूमि में भारतीय नारी की विवशताओं का चित्रण करने वाला एक सशक्तम उपन्यास है...

Nirmala

अद्भुत कथाशिल्पी प्रेमचंद की कृति ‘निर्मला’ दहेज प्रथा की पृष्ठभूमि में भारतीय नारी की विवशताओं का चित्रण करने वाला एक सशक्तम उपन्यास है। यह उपन्यास नवम्बर 1925 से नवम्बर 1926 तक धारावाहिक के रूप में प्रकाशित हुआ था किन्तु यह इतना यथार्थवादी है कि 60 वर्षों के उपरांत भी समाज की कलुषिताओं का आज भी उतना ही सटीक एवं मार्मिक चित्र प्रस्तुत करता है।

‘निर्मला’ एक ऐसी अबला की कहानी है जिसने अपने भावी जीवन के सपनों को अल्हड़ कल्पनाओं में संजोया किन्तु दुर्भाग्य से उन्हें साकार नहीं होने दिया। निर्मला की शादी के पहले उसके पिता की मृत्यु हो जाती है। यह मृत्यु लड़के वालों को यह विश्वास दिला देती है कि अब उन्हें उतना दहेज नहीं मिलेगा जितने की उन्हें अपेक्षा थी। आखिर निर्मला का विवाह एक अधेड़ अवस्था के विधुर से होता है।

इस उपन्यास की एक अन्य विशेषता - करुणा प्रधान चित्रण में कथानक अन्य रसों से भी सराबोर है।


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