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गीता प्रेस, गोरखपुर >> सब जग ईश्वररूप है

सब जग ईश्वररूप है

स्वामी रामसुखदास

1.95

प्रकाशक : गीताप्रेस गोरखपुर प्रकाशित वर्ष : 2004
आईएसबीएन : 00000 पृष्ठ :90
आवरण : पुस्तक क्रमांक : 1165
 

प्रस्तुत है सब जग ईश्वररूप है....

इस पुस्तक में भक्तियोग की मुख्यता है गीता में भगवान् वासुदेवःसर्वम् की बात भक्तियोग की दृष्टि से कही है।

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