और कारवाँ बनता गया शत्रुघ्न प्रसाद सिंह - शहरोज़ Aur Karvan Banta Gaya Shatrughan Prasad Singh - Hindi book by - shahroz
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जीवनी/आत्मकथा >> और कारवाँ बनता गया शत्रुघ्न प्रसाद सिंह

और कारवाँ बनता गया शत्रुघ्न प्रसाद सिंह

शहरोज़

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2017
आईएसबीएन : 9788126730124 मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पृष्ठ :204 पुस्तक क्रमांक : 10021

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प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

यह पुस्तक बिहार शिक्षक-आन्दोलन के प्रखर नेता और पूर्व-सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह की आत्मकथा पुस्तक है जिसमें उन्होंने अपने निजी और सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ अपने व्यापक अनुभवों के आधार पर बने विचारों को भी व्यक्त किया है। शिक्षक की अपनी मूल पहचान को अपने सार्वजनिक जीवन की धुरी मानते हुए उन्होंने जिस तरह लम्बे समय तक इस देश की सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक परिस्थितियों को समझा, यह पुस्तक उसका लेखा-जोखा है। इसलिए निजी यादों के विवरण से ज्यादा हम इसे एक वैचारिक दस्तावेज के रूप में भी पढ़ सकते हैं जिसमें शिक्षा-तंत्र और अध्यापकों के संघर्ष से लेकर देश के वर्तमान सामाजिक यथार्थ, ग्रामीण भारत की वस्तुस्थिति, मजदूरों का पलायन, सत्ता और भ्रष्टाचार का गठजोड़, अपराध की राजनीतिक ताकत से लेकर इधर के ताजातरीन मुद्दों, मसलन रोहित वेमुला की आत्महत्या तथा जे.एन.यू.में कन्हैया की अलोकतांत्रिक गिरफ्तारी तक पर विचार किया गया है।

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