Vidyasagar Nautiyal/विद्यासागर नौटियाल
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लेखक:

विद्यासागर नौटियाल
जन्म : 29 सितम्बर, 1933

निधन : 18 फरवरी 2012

उत्तर भारत की एक पहाड़ी रियासत टिहरी-गढ़वाल में भागीरथी के तट पर मालीदेवल गाँव में राजगुरु परिवार में आपका जन्म हुआ। पिता की दूसरी संतान थे। रियासत के दूरस्थ विद्यालय-विहीन वनों में रहते हुए वन अधिकारी पिता नारायण दत्त प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही देते रहे।

शिक्षा : प्रताप इंटर कालेज, टिहरी से हाई स्कूल, डी.ए.वी. कॉलेज, देहरादून से इंटर, काशी हिंदू विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में एम.ए.।

लेखन-कार्य 1949 से 1960 तक। ’60 से ’90 तक लंबे अवकाश के उपरांत पुनः लेखन प्रारंभ।

राजनीति : 13 वर्ष की आयु में सामन्ती सरकार ने भारत की आजादी के बाद 18 अगस्त 1947 को गिरफ्तार कर कॉलेज से भी निकाल दिया। शहीद नागेन्द्र सकलानी के साथ कार्य किया। 1957 में ऑल इंडिया स्टूडेन्ट फेडरेशन के अध्यक्ष निर्वाचित। स्वाधीन भारत की जेलों में लगभग तीन वर्ष तक बन्दी। पहाड़ों में वनों के निर्मम संहार के विरुद्ध छेड़े गये ‘चिपको’ आंदोलन के प्रबल समर्थक। टिहरी ऋषिकेश में अनेक मजदूर संघों में कार्यरत। 1980 में देवप्रयाग क्षेत्र 77 से उत्तर प्रदेश की विधान सभा के लिये निर्वाचित कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से।

कृतियाँ :

उपन्यास : उलझे रिश्ते, भीम अकेला, सूरज सबका है, उत्तर बयाँ है, झुण्ड से बिछुड़ा, यमुना के बागी बेटे।

कहानी-संग्रह : टिहरी की कहानियाँ, सुच्चि डोर, दस प्रतिनिधि कहानियाँ :- (उमर कैद, खच्चर फगणू नहीं होते, फट जा पंचधार, सुच्ची डोर, भैंस का कट्या, माटी खायँ जनावराँ, घास, सोना, मुलज़िम अज्ञात, सन्निपात।)।

आत्मकथ्य : मोहन गाता जाएगा।

10 प्रतिनिधि कहानियाँ (विद्यासागर नौटियाल)

विद्यासागर नौटियाल

मूल्य: $ 10.95

प्रस्तुत संकलन में जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया गया है, वे हैं; ‘उमर कैद’,‘खच्चर फगणू नहीं होते’, ‘फट जा धार’, ‘सुच्ची डोर’, ‘भैंस का कट्या’, ‘माटी खायँ जनावराँ’, घास’, ‘सोना’, ‘मुलज़िम अज्ञात’ तथा ‘सन्निपात’।   आगे...

उत्तर बायां है

विद्यासागर नौटियाल

मूल्य: $ 15.95

यह उपन्यास बेचैन करने वाले यथार्थ और जमीनी सच्चाइयों, आपसी रिश्तों को ध्यान में रखकर लिखा गया है...   आगे...

झुण्ड से बिछुड़ा

विद्यासागर नौटियाल

मूल्य: $ 6.95

पर्वतीय जन-जीवन की त्रासदी का वर्णन....   आगे...

भीम अकेला

विद्यासागर नौटियाल

मूल्य: $ 3.95

‘भीम अकेला’ में हमारे देश की कई छायाएँ एक साथ उभरती हैं-इन छायाओं में जातीय स्मृति की कौध है और अपनी सामाजिक आस्थाओं के मलीन पड़ते जाने का दर्द भी।

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यमुना के बागी बेटे

विद्यासागर नौटियाल

मूल्य: $ 9.95

‘यमुना के बागी बेटे’ पहले शब्द से अखिरी शब्द तक एक बेचैनी से लड़ता हुआ उपन्यास है...   आगे...

स्वर्ग दद्दा ! पाणि, पाणि

विद्यासागर नौटियाल

मूल्य: $ 12.95

पर्यावरण की चिन्ता को लेकर बना नौटियाल जी का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण उपन्यास ‘स्वर्ग दद्दा ! पाणि, पाणि’   आगे...

 

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