ईश्वर भी परेशान है
पृष्ठ 216
मूल्य $ 19.95
सामाजिक घटनाओं या प्रसंगों पर लेखन की चुटीली टिप्पणियाँ। आगे...
भारत एक बाजार है
पृष्ठ 168
मूल्य $ 7.95
समकालीन सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था से रू-ब-रू कराते व्यंग्य-निबन्ध आगे...
ख़्वाब के दो दिन
पृष्ठ 283
मूल्य $ 10.95
ख़्वाब के दो दिन आगे...
जिस्म जिस्म के लोग
पृष्ठ 76
जिस्म जिस्म के लोग आगे...
आओ भ्रष्टाचार करें
पृष्ठ 160
मूल्य $ 9.95
भ्रष्टाचार के अनेक लाभ हैं। पहला लाभ तो यह है कि देश-विदेश में नाम हो जाता है आगे...
मेरे पापा की शादी
पृष्ठ 288
मूल्य $ 21.95
व्यंग्य उपन्यास ‘मेरे पापा की शादी’ का केवल एक ही मकसद है, आपके होठों पर मुस्कराहट की लकीर खींचना। आगे...
चुटीली चिकौटियाँ
पृष्ठ 165
मूल्य $ 8.95
चुटीली चिकौटियाँ... आगे...
लगभग सिंगल
पृष्ठ 292
मूल्य $ 11.95
बेपरवाह और बेहद मज़ाकिया, ऑल्मोस्ट सिंगल, अकेली औरतों की ज़िन्दगी की झलकियां आगे...
यूँ ही
पृष्ठ 138
यूँ ही आगे...
चक्रधर चमन में
पृष्ठ 182
मूल्य $ 17.95
हास्य-व्यंग्य-व्यंजित अति मनरंजित गद्यपचीसी... आगे...
फ्री हिट
पृष्ठ 159
‘फ्री हिट’ की रचनाएं न सिर्फ हँसाएंगी, भारतीय जन-जीवन और समय को देखने वाली एक खास नजर भी उपलब्ध कराएंगी। आगे...
व्यंग्यपुराणम
पृष्ठ 197
मकबूल फिदा हुसैन माधुरी दीक्षित के पीछे पड़े रहते हैं और वामपंथी लोग ममता बनर्जी के पीछे पड़े रहते हैं, तो बिहार में कुछ लोग राबड़ी देवी के पीछे पड़े हैं... आगे...
मन मस्त हुआ
पृष्ठ 150
‘मन मस्त हुआ’ की कविताएँ पढ़ते समय आपको महसूस होगा कि आपने इस दौर के सर्वश्रेष्ठ हास्य-कवि की रचनाओं से साक्षात्कार किया है... आगे...
अलग
पृष्ठ 312
मूल्य $ 24.95
सामयिक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, विसंगतियों और विडम्बनाओं पर तीखा प्रहार करते हुए व्यंग्य परम्परा को एक नई भाषा और शिल्प प्रदान करनेवाला विशिष्ट संकलन... आगे...
मूल्य $ 14.95
इस पुस्तक में संकलित व्यंग्य रचनाओं का दायरा राजनीति, समाज, धर्म, प्रशासन, मध्यवर्गीय आकांक्षाओं की विकृतियों से लेकर बाज़ारीकरण, देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार तक फैला हुआ है... आगे...
नेताजी कहिन
पृष्ठ 158
नेताजी पर आधारित व्यंग्य लेख... आगे...
ममता
पृष्ठ 151
मूल्य $ 16.95
शिशु मनोविज्ञान केन्द्रित पारिवारिक उपन्यास। आगे...
बालम तू काहे न हुआ एन.आर.आई.
पृष्ठ 190
अगर सुदामा परदेश नहीं जाते, तो क्या इतने फेमस हो पाते ? नहीं। बालम, तू काहे न हुआ एन. आर. आई. आलोक पुराणिक का नया व्यंग्य संग्रह है। आगे...
फ्रेम से बड़ी तस्वीर
अश्विनी कुमार दुबे की व्यंग्य रचनाओं का संग्रह... आगे...
सरकार का घड़ा
पृष्ठ 166
इन रचनाओं में राजनीतिक और सामाजिक विसंगतियों में फँसे आम आदमी की पीड़ा अभिव्यक्त हुई है, जो पाठक को संवेदनशील बनाती है। आगे...
चर्चित पुस्तकें
सोने का किला सत्यजित राय
कुरु कुरु स्वाहा मनोहर श्याम जोशी
अग्निव्यूह श्रीराम दूबे
अमली हृषीकेश सुलभ
तत सम राजी सेठ
लाल पसीना अभिमन्यु अनत
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