धूप, गंध, चाँदनी
पृष्ठ 138
मूल्य $ 14.95
घनश्याम गुप्ता, बीना टोडी, राकेश खण्डेलवाल, अर्चना पंडा तथा डॉ. विशाखा ठाकर ‘अपराजिता’ का काव्य संग्रह... आगे...
पुष्प परिजात के
पृष्ठ 120
मूल्य $ 7.95
इस नए काव्य में नीरज की कविता के चार रंगों - गीत, ग़ज़ल, दोहे व मुक्तक - की रंगोली सजी है। आगे...
ओक भर किरनें
पृष्ठ 96
मूल्य $ 10.95
चोका (लम्बी कविता) संग्रह आगे...
पीड़ा, नींद और एक लड़की
पृष्ठ 124
मूल्य $ 11.95
पीड़ा, नींद और एक लड़की आगे...
खत्म नहीं होती बात
पृष्ठ 128
मूल्य $ 9.95
जीने का सहजबोध और उसको सराहती-संभालती दुधमुँही कोंपलों-सी कुछ यादें, कुछ कचोटें, कुछ लालसाएँ और कुछ शिकायतें करती बोधिसत्व की कविताएँ आगे...
जो नदी होती
पृष्ठ 84
प्रज्ञा की कविताओं में न तो स्त्री विमर्श का कोई अतिरंजित स्वर है, न ही कोई अन्य ग्रन्थि। जो है, जीवन का सहज स्वीकार और अभिव्यक्ति है, बहुत कुछ सुभद्राकुमारी चौहान की तरह। आगे...
ये गलत बात है
पृष्ठ 111
‘ये गलत बात है’ कवि-कहानीकार मनोज कुमार शर्मा का पठनीय कविता-संग्रह है। आगे...
नष्ट कुछ भी नहीं होता
पृष्ठ 134
प्रियदर्शन की कविताएँ आगे...
टुकड़ा कागज का
कल्पना, भाव, संवेदना, यथार्थ - सब कुछ संजोता है - टुकड़ा कागज का आगे...
धार पर हम
पृष्ठ 140
दीप में कितनी जलन है, धूप में कितनी तपन है,यह बताएंगे तुम्हें वे, ज़िन्दगी जिनकी हवन है आगे...
धार पर हम (दो)
पृष्ठ 240
मूल्य $ 24.95
यह दस्तावेजी कृति विवादास्पद हो सकती है, प्रतिरोधात्मक भी हो सकती है, पर किसी भी कीमत पर केवल अलमारी की शोभा नहीं बन सकती आगे...
दिन क्या बुरे थे
पृष्ठ 102
मूल्य $ 17.95
गीत के सफर में एक सवाल अक्सर किया गया कि मैं क्यों लिखता हूँ और किसके लिए लिखता हूँ आगे...
हो न हो !
सुधीर मौर्य की कविताएं भाव और भाषा में सौंधी ताजगी देती हैं, जो आकर्षक भी हैं व अपनी छाप भी मन पर छोड़ती हैं आगे...
अक्षर अक्षर चूम लिया
पृष्ठ 112
‘अक्षर अक्षर चूम लिया’ काव्यसंग्रह में कवि ने गीतों और गजलों को पड़ोसी बना दिया है आगे...
शूर्पणखा
पृष्ठ 64
शूर्पणखा खण्डकाव्य की कथावस्तु रामायण कालीन होते हुये भी आज भी प्रासंगिक है आगे...
मुट्ठी भर रोशनी
पृष्ठ 160
मूल्य $ 16.95
चाँदनी रात भर पास बैठी रही, हम अंधेरों में अपने भटकते रहे आगे...
नये समर के लिए
कथ्य प्रधान कविता सामूहिक संवेदन को ललकारती है आगे...
अँजुरी भर स्पन्दन
मूल्य $ 8.95
प्रणय मूल्य था कठिन बहुत, पर चाहा मैंने मूल्य चुकाना आगे...
चेतना के सप्त स्वर
चेतना के सप्त स्वर, मुखरित हुए है वेदना से। दे सकें यदि प्रेरणा तो धन्य हूँ इस प्रेरणा से।। आगे...
सागर लहरें और भंवर
हृदय के उद्गार कहे तुमसे तो मन कुछ शांत हुआ। रात बिछोह के बाद मिलन हुआ तो मन कुछ शांत हुआ। आगे...
चर्चित पुस्तकें
सोने का किला सत्यजित राय
कुरु कुरु स्वाहा मनोहर श्याम जोशी
अग्निव्यूह श्रीराम दूबे
अमली हृषीकेश सुलभ
तत सम राजी सेठ
लाल पसीना अभिमन्यु अनत
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