ऋग्वेद संहिता - भाग 1
पृष्ठ 415
मूल्य $ 14.95
ऋग्वेद का विवरण (मण्डल 1-2) आगे...
ऋग्वेद संहिता - भाग 4
पृष्ठ 480
मूल्य $ 13.95
ऋग्वेद का विवरण (मण्डल 9-10) आगे...
ऋग्वेद संहिता - भाग 2
पृष्ठ 428
ऋग्वेद का विवरण (मण्डल 3-6)। आगे...
ऋग्वेद संहिता - भाग 3
पृष्ठ 364
ऋग्वेद का विवरण (मण्डल 7-8) आगे...
अथर्ववेद संहिता - भाग 1
पृष्ठ 520
अथर्ववेद संहिता सरल हिन्दी भावार्थ सहित (काण्ड 1-10)। यह संकलन दो भागों में आता है। आगे...
अथर्ववेद संहिता - भाग 2
पृष्ठ 444
अथर्ववेद का सरल हिन्दी भावार्थ (काण्ड 11-20) आगे...
सामवेद संहिता
पृष्ठ 332
मूल्य $ 12.95
सामवेद संहिता सरल हिन्दी भावार्थ सहित। आगे...
यजुर्वेद संहिता
पृष्ठ 432
यजुर्वेद संहिता सरल हिन्दी भावार्थ सहित। आगे...
108 उपनिषद - भाग 1
पृष्ठ 512
सरल हिन्दी भावार्थ सहित ज्ञानखण्ड आगे...
108 उपनिषद - भाग 2
पृष्ठ 424
सरल हिन्दी भावार्थ सहित (ब्रह्मविद्या खण्ड) आगे...
108 उपनिषद - भाग 3
पृष्ठ 359
सरल हिन्दी भावार्थ सहित (साधना खण्ड) आगे...
तैत्तरीयोपनिषद्
पृष्ठ 223
मूल्य $ 1.95
इसमें भगवान् ने बतलाया है कि मोक्षरूप परम निःश्रेयसकी प्राप्ति का एकमात्र साधन हेतु ज्ञान ही है। इसके लिए कोई अन्य साधन नहीं है। आगे...
प्रश्नोपनिषद्
पृष्ठ 128
सानुवाद शांकरभाष्य सहित प्रश्नोपनिषद् की मार्मिक प्रस्तुति। प्रश्नोपनिषद अथर्ववेदीय ब्राह्मणभाग के अन्तर्गत है। इस उपनिषद् के छः खण्ड हैं, जो छः प्रश्न कहे जाते हैं। आगे...
ईशावास्योपनिषद्
पृष्ठ 46
ईशावास्योपनिषद् सानुवाद शांकरभाष्यसहित... आगे...
केनोपनिषद्
पृष्ठ 141
प्रस्तुत है केनोपनिषद्... आगे...
ऐतरेयोपनिषद्
पृष्ठ 93
प्रस्तुत है सानुवाद शांकरभाष्यसहित ऐतरेयोपनिषद्... आगे...
69 माण्डूक्योपनिषद्
पृष्ठ 287
मूल्य $ 4.95
माण्डूक्योपनिषद् ... आगे...
श्वेताश्वतरोपनिषद्
पृष्ठ 255
मूल्य $ 3.95
श्वेताश्वतरोपनिष्द कृष्णयजुर्वेद के अन्तर्गत है। इसके वक्ता श्वेताश्वरतर ऋषि है। उन्होंने चतुर्थाश्रमियों को इस विद्या का उपदेश किया था। यह बात इस उपनिषद् के षष्ठ अध्याय के इक्कीसवें मन्त्र से विदित होती है। आगे...
कठोपनिषद्
पृष्ठ 160
कठोपनिषद् कृष्णयजुर्वेद की कठशाखा के अन्तर्गत है। इसमें यम और नाचिकेता के संवादरूप से ब्रह्मविद्या का बड़ा विशद वर्णन किया गया है... आगे...
क्या कहते है उपनिषद
पृष्ठ 173
मूल्य $ 6.95
‘उप’, ‘नि’,‘षद्’ - इसका विश्लेषण किया जाय तो ‘उप’ अर्थात् पास में, ‘नि’ अर्थात् निष्ठापूर्वक और ‘षद्’ अर्थात् बैठना... इस प्रकार शाब्दिक अर्थ हुआ - तत्त्वज्ञान के लिए गुरु के पास निष्ठावान होकर बैठना। आगे...
चर्चित पुस्तकें
सोने का किला सत्यजित राय
कुरु कुरु स्वाहा मनोहर श्याम जोशी
अग्निव्यूह श्रीराम दूबे
अमली हृषीकेश सुलभ
तत सम राजी सेठ
लाल पसीना अभिमन्यु अनत
समाचार और सूचनाऍ
Font : CDACGIS1 CDACGIS2 GISTDVO0 GISTDVO1 GISTDVO2 GISTDVO3 GISTDVO4 GISTDVO5 MANGAL1 ARIALUN0