Pani ke Bulbule - A Hindi Book by - Pravesh Dhawan - पानी के बुलबुले - प्रवेश धवन
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Pani ke Bulbule

पानी के बुलबुले

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प्रवेश धवन<<आपका कार्ट
मूल्य$ 12.95  
प्रकाशककलावती प्रकाशन
आईएसबीएन9788188167568
प्रकाशितजनवरी ०१, २०११
पुस्तक क्रं:8770
मुखपृष्ठ:सजिल्द

सारांश:
Pani ke Bulbule

प्रवेश धवन को अपने आसपास के परिवेश की प्रामाणिक जानकारी है। वह नारी मन के स्तर-दर-स्तर फैले अंतर्द्वन्दों का सहज आकलन तो करती ही हैं, पर कुछ ऐसी स्थितियों को भी निर्दिष्ट करती हैं जिन पर पाठकों को सोचने के लिए ठहरने का धीरज संजोना पड़ता है।

कथा संग्रह की प्रथम कहानी, ‘नीलिमा’ में विदूषी अपने आफिस के एक ऐसे विवाहित पुरुष से प्रेम कर बैठती है जो तीन बच्चों का पिता है। उससे वह दाम्पत्य जीवन का भरपूर आनन्द उठाती है। पर उसका प्रेम स्वार्थ की धरातल पर टिका था क्योंकि समीर के रिटायर होते ही उसमें विदूषी की रुचि कम हो जाती है और उसका झुकाव अपने नये बॉस की तरफ हो जाता है। दूसरी ओर नीलिमा जो समीर की पत्नी है, अपनी सारी जिन्दगी तपस्या के रूप में बिता देती है और केवल समीर की होते हुये भी ब्रह्मचर्य का व्रत ले लेती है। परिस्थितियां चाहे कुछ भी रही हों, वह धारज का साथ नहीं छोड़ती और उनका सामना करती है। अन्ततः जीवन के अन्तिम पड़ाव में समीर उसी तरह घर लौटता है जैसे संध्या बेला में पक्षी अपने घोंसलों में लौटते हैं और जीवन की सांझ में दोनों, एक छत के नीचे, एक दूसरे का सुख-दुःख बांटते हुये, दो मित्रों की तरह जीवन बिताने लगते हैं।
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